Pollution: दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-4 लागू, कई इलाकों में खतरनाक हुई हवा…

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दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक आज शाम चार बजे 400 दर्ज किया गया था, जो बढ़कर रात आठ बजे 428 हो गया। पश्चिमी विक्षोभ, प्रतिकूल मौसम और प्रदूषकों के फैलाव में कमी जैसे कारकों के कारण एक्यूआई में यह तेजी देखी गई। जिसके बाद दिल्ली एनसीआर में ग्रैप 4 लागू हो गया है।

वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए उठाए जा रहे कदम
यह कदम मौजूदा ग्रैप के स्टेज 1, 2 और 3 के तहत एनसीआर में पहले से लागू किए जा रहे उपायों के अतिरिक्त है। ग्रैप-4 में वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर को नियंत्रित करने के लिए और अधिक कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इन उपायों में निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर रोक, औद्योगिक गतिविधियों पर अंकुश, और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देना शामिल हो सकता है। इन कदमों का उद्देश्य हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना और नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाना है।

 

इसके अतिरिक्त, एनसीआर प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और अन्य संबंधित एजेंसियों को क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकने के लिए निवारक उपायों को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इन एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि लागू किए गए उपायों का प्रभावी ढंग से पालन हो और प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए। इन संयुक्त प्रयासों के माध्यम से ही दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटा जा सकता है।


 

ग्रैप क्या है और इसे कब लागू किया गया था?
ग्रैप को पहली बार 2017 में पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया था। यह योजना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गठित एनवायरनमेंट पॉल्यूशन (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) अथॉरिटी के माध्यम से लागू की जाती है।

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वायु गुणवत्ता में ग्रैप का स्तर
दिल्ली में प्रदूषण गंभीर स्तर (एक्यूआई 401-450) के बीच दर्ज किया गया, जिसके बाद पूरे एनसीआर में स्टेज तीन लागू हो गया।
स्टेज 1: खराब (एक्यूआई 201-300)
स्टेज 2: बहुत खराब (एक्यूआई 301-400)
स्टेज 3: गंभीर (एक्यूआई 401-450)
स्टेज 4: गंभीर प्लस (एक्यूआई 450 से ऊपर)
स्टेज 3 हटने के साथ ही सख्त उपायों में ढील दी गई है।

नवंबर 2025 में ग्रैप नियमों में क्या बदलाव किए गए थे?
नवंबर 2025 में CAQM ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रैप नियमों को और सख्त किया था।
अब कई प्रतिबंध पहले की तुलना में पहले ही स्टेज पर लागू हो जाते हैं।
जो उपाय पहले स्टेज II (AQI 201-300) में लागू होते थे, वे अब स्टेज I में ही लागू हो रहे हैं।
स्टेज III (AQI 301-400) के कुछ उपायों को स्टेज II में शिफ्ट किया गया
वहीं, जो पाबंदियां पहले सिर्फ स्टेज IV (गंभीर+) में थीं, वे अब स्टेज III में लागू की जा रही हैं।
यह बदलाव दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अधिक आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।


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