कफ सिरप: 2 और कफ सिरप में मिला जहरीला केमिकल, जांच में री-लाइफ और रेस्पिफ्रेश TR में पाई गई गड़बड़ी

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छिंदवाड़ा में बच्चों की संदिग्ध मौतों के बाद प्रदेश में खांसी की दवाओं की जांच का दायरा और भी बड़ा हो गया है। मध्यप्रदेश की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा कराई गई नई जांच रिपोर्ट में दो और कफ सिरप- ‘री-लाइफ’ और ‘रेस्पिफ्रेश टीआर’ में खतरनाक रसायन डायएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) की मानक से कई गुना अधिक मात्रा पाई गई है। दोनों ही सिरप गुजरात में निर्मित हैं। यह वही रसायन है जो पहले से प्रतिबंधित तमिलनाडु निर्मित कोल्ड्रिफ सिरप में भी पाया गया था और जिसे बच्चों में किडनी फेल और न्यूरोलॉजिकल डैमेज जैसी घातक स्थितियों के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।

क्या सामने आया जांच में?
26 से 28 सितंबर 2025 के बीच छिंदवाड़ा में की गई औषधि निरीक्षण कार्रवाई के तहत 19 नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए थे। सोमवार को आई रिपोर्ट में 4 सिरप असुरक्षित पाए गए। स्वीकृत मानक के अनुसार, DEG की अधिकतम मात्रा 0.1% होनी चाहिए, लेकिन इन सिरप में यह कहीं अधिक पाई गई।

यह तीन सिरप निकले खतरनाक 

    • मध्यप्रदेश की रिपोर्ट में तमिलनाडु से आए कोल्ड्रिफ (Coldrif) बैच नंबर SR-13 में 46.2% डायएथिलिन ग्लायकॉल (DEG) का पुष्टि हुई है। जबकि, तमिलनाडु से आई रिपोर्ट में कोल्ड्रिफ सिरप में 48.6% DEG का पुष्टि हुई थी।
  • गुजरात के राजकोट से आए री लाइफ सिरप (Relife) बैच नंबर LSL25160 में 0.616% डायएथिलिन ग्लायकॉल (DEG) का पुष्टि हुई है।
  • गुजरात के अहमदाबाद से आए रेस्पिफ्रेस टीआर (Respifresh TR) सिरप बैच नंबर R01GL2523 में 1.342% डायएथिलिन ग्लायकॉल (DEG) का पुष्टि हुई है।
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इन दवाओं पर पहले लग चुकी है रोक
कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस जैसे सिरप पहले ही प्रतिबंधित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, इंदौर की फार्मा कंपनी द्वारा बनाई गई डिफ्रॉस्ट सिरप को भी बाजार से वापस मंगाने के निर्देश दिए गए हैं। आर्क फार्मास्यूटिकल्स, इंदौर को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया है।

अब इन दो रसायनों को लेकर भी चेतावनी
राज्य सरकार ने दवा कारोबार से जुड़े सभी अधिकारियों, निरीक्षकों और मेडिकल कॉलेजों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें क्लोरफेनिरामाइन मलेट और फिनाइलफ्रिन एचसीएल के उपयोग को लेकर सावधानी बरतने को कहा गया है। ये रसायन अक्सर कफ सिरप में उपयोग होते हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह पर बच्चों में गंभीर असर डाल सकते हैं।

जांच और कार्रवाई में तेजी
राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में औषधि निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है। जिस भी दवा या सिरप पर संदेह है, उसे तुरंत बाजार से हटाने का आदेश दिया जा रहा है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि सरकार मरीजों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले की तह तक जाने के लिए जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट और मंडला जिलों के औषधि निरीक्षकों को मिलाकर एक विशेष जांच दल (SIT) बनाया गया है। यह टीम यह तय करेगी कि किन स्तरों पर चूक हुई और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई बनती है।


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