पौड़ी : शिक्षक दिवस पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले 22 शिक्षकों-शिक्षिकाओं को प्रमाण पत्र व स्मृति चिह्न भेट कर किया सम्मानित।

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शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित राजकीय इण्टर कॉलेज सभागार पौड़ी में पंडित दीनदयाल शैक्षिक सम्मान समारोह में स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी, जिलाधिकारी डॉ विजय कुमार जोगदण्डे व अध्यक्ष नगर पालिका परिषद पौड़ी यशपाल बेनाम सहित अन्य अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ अथितियों द्वारा डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यापर्ण व द्वीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम में अथितियों ने हाईस्कूल व इण्टर की परिषदीय परीक्षा में उत्कृष्ट परीक्षाफल देने वाले 19 विद्यालयों को पं0 दीनदयाल उत्कृष्टता पुरुस्कार से सम्मानित किया। शिक्षण कार्यो/पठन-पाठन में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 22 शिक्षकों-शिक्षिकाओं को प्रमाण पत्र व स्मृति चिह्न भेट कर सम्मानित किया।
डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर जिला मुख्यालय सहित क्षेत्रीय शिक्षण संस्थानों में शिक्षक दिवस धूम-धाम से मनाया गया। जिला मुख्यालय स्थिति राजकीय इण्टर कालेज पौड़ी में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने शिक्षकों व छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षक का महत्व हर युग में परिलक्षित होता है। उन्होने कहा कि शिक्षक छात्रों के भाग्य का विधाता होता है इसलिए प्रत्येक शिक्षक को अपने दायित्व का शतप्रतिशत निर्वह्न व छात्रों को अपने विवेक व आचरण पर विशेष बल दिये जाने की आवश्यकता है ताकि विकसित व समृद्व भारत के सपने को साकार किया जा सके। उन्होने शिक्षकों व छात्रों से कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बहुमुल्य योगदान देने वाले डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पदचिन्हो पर चलते हुए देश व समाज को और अधिक शिक्षित व विकसित करने का प्रयत्न करना चाहिए। इस अवसर पर उन्होने अपने जीवन में शिक्षा के प्रति किये गये प्रयासों से भी उपस्थितों को अवगत कराया।
जिलाधिकारी डॉ विजय कुमार जोगदण्डे ने कहा कि हर व्यक्ति के भविष्य निर्धारण में किसी न किसी शिक्षक का महत्वपूर्ण योगदान होता है। उन्होने कहा कि एक बच्चे का लालन-पालन निसंदेह अभिभावक द्वारा किया जाता है लेकिन उनके भविष्य का निति-निर्माता एक शिक्षक होता है। कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में कुछ नया सीखने की हमेशा से सम्भावना रहती है, इस भाव से हर व्यक्ति को नित्-दिन कुछ न कुछ नया सीखने का प्रयास उसे दूसरो से बेहतर बनाता है। उन्होने कहा कि एक विद्यार्थी किसी शिक्षक के सानिध्य में बमुश्किल एक से दो वर्ष तक रहता है जबकि एक शिक्षक के जीवन काल में यह अवसर बारंबार आता है। इसलिए शिक्षक द्वारा इन एक से दो वर्षो के बीच में छात्रों को दी जाने वाली शिक्षा उनके भविष्य के निर्माण का अधार स्तम्भ होता है।

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