“कांग्रेस”- अब कांग्रेस सजा सकती है अटल के नाम पर सियासी बिसात!क्या है समाधियों पर श्रद्धांजलि का समाजशास्त्र

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“कांग्रेस”- अब कांग्रेस सजा सकती है अटल के नाम पर सियासी बिसात!क्या है समाधियों पर श्रद्धांजलि का समाजशास्त्र

कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम की समाधि पर श्रद्धांजलि देने के साथ 2024 के लोकसभा चुनावों में बहुत कुछ साधने की तैयारी कर ली है। सियासी जानकारों का कहना है कि भारत जोड़ो यात्रा के ब्रेक के दौरान, जिस तरह राहुल गांधी ने देश के तमाम बड़े नेताओं की समाधि ऊपर जाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए हैं, उसके सियासी मायने भी खूब निकाले जा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर राहुल गांधी ने एक साथ किसानों, दलितों और ब्राह्मणों को न सिर्फ साधा है, बल्कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के विकास में योगदान करने वाले राजनेताओं को अपना मानने का भी बड़ा दांव चला है।

ब्राह्मणों में पैठ बनाने की कोशिश

सियासी गलियारों से सबसे ज्यादा चर्चा भारत जोड़ो यात्रा के ब्रेक के दौरान राहुल गांधी की देश को विकास के पथ पर ले जाने वाली विभूतियों की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने को लेकर हो रही है। दरअसल राहुल गांधी कि भारत जोड़ो यात्रा शनिवार को जब नौ दिन के लिए रुकी, तो उसी दिन शाम को अलग-अलग समाधि स्थल पर जाकर राहुल गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित करने थे। लेकिन कार्यक्रम में देरी की वजह से उसे रविवार के लिए एक दिन आगे बढ़ा दिया गया। बाद में इस कार्यक्रम को सोमवार के लिए आगे बढ़ाया गया। भारत यात्रा के ब्रेक के दौरान जब यह तय हुआ कि राहुल गांधी देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि स्थल पर भी जाएंगे, तो सियासी गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गईं कि क्या राहुल गांधी अटल जी की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करके भाजपा के एक उस विशेष वर्ग में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अटल जी को आदर्श मानते रहे हैं। सियासी जानकार कहते हैं कि राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर न सिर्फ राजनीतिक रूप से बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी एक बड़ा फैसला लिया है।

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राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर रामेंद्र कुमार शर्मा कहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समाधि स्थल पर जाने से राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लोगों के बीच में एक बड़ा संदेश तो चला ही गया है कि कैसे उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भाजपा के कद्दावर नेता को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। प्रोफेसर शर्मा कहते हैं कि अटल को श्रद्धा सुमन अर्पित करके कांग्रेस ने सियासी तौर पर भी एक बड़ा दांव चला है। उनका मानना है जिस तरीके से राहुल गांधी लगातार अपनी रैलियों में नफरत, मोहब्बत और प्यार की बात करते हैं, ठीक उसी दिशा में चलते हुए राहुल गांधी ने वाजपेयी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की भी हो रही है कि राहुल गांधी ने जिस तरीके से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समाधि स्थल पर जाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए हैं, उससे देश के ब्राह्मणों में एक बड़ा संदेश भी गया है।

जाटों-किसानों में पैठ

राहुल गांधी ने सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री पंडित अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर जाकर श्रद्धा सुमन अर्पित नहीं किए बल्कि किसानों के बड़े नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की समाधि स्थल पर भी जाकर श्रद्धांजलि दी। राजनीतिक विश्लेषक ओपी तंवर कहते हैं कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जब तीन जनवरी से शुरू होगी, तो किसानों के उसी गढ़ से होकर के निकलेगी जहां पर चौधरी चरण सिंह का आज भी वजूद कायम है। तंवर कहते हैं कि राहुल गांधी ने चौधरी चरण सिंह की समाधि पर पुष्प अर्पित करके न सिर्फ किसानों में, बल्कि चौधरी चरण सिंह की नीतियों में भरोसा करने वाले एक बड़े समुदाय में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। क्योंकि 3 जनवरी से राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा गाजियाबाद से होते हुए बुलंदशहर और फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों से होते हुए हरियाणा के उन जिलों में प्रवेश करेगी, जहां पर किसानों का सबसे ज्यादा सियासी दखल है। चौधरी चरण सिंह की समाधि पर पहुंचकर राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा की अगली शुरुआत से पहले न सिर्फ सियासी समीकरण ही साधे हैं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के गठबंधन को भी अंदरूनी तौर पर चुनौती दी है। राजनैतिक विश्लेषक कहते हैं कि कभी कांग्रेस का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गढ़ हुआ करता था। बदले सियासी मिजाज में कांग्रेस का गढ़ तो छिन ही गया बल्कि चौधरी चरण सिंह की पार्टी का गठबंधन भी समाजवादी पार्टी के साथ हो गया। वह मानते हैं कि राहुल गांधी का दिल्ली में चौधरी चरण सिंह की समाधि पर जाकर श्रद्धांजलि देना आने वाले लोकसभा के चुनावों में सियासी समीकरण साधने में मदद करेगा।

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दलितों में बड़ा संदेश देने की कोशिश

राहुल गांधी ने सोमवार को देश के तमाम बड़े राजनेताओं की समाधि पर जाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए, उसमें बाबू जगजीवन राम भी शामिल हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि सियासत में उठाए जाने वाले किसी भी तरह के सिर्फ एक ही महीने नहीं होते हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी जब बाबू जगजीवन राम की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचे होंगे, तो निश्चित तौर पर सामाजिक सद्भाव और एकता की मिसाल देने के लिए ही पहुंचे होंगे। लेकिन बाबू जगजीवन राम श्रद्धांजलि देने के साथ ही राहुल गांधी ने देश के दलितों में भी एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।


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