जम्मू-कश्मीर- कुलगाम में ‘टारगेट किलिंग’: आतंकियों की फायरिंग में 1 गैर-स्थानीय मजदूर की मौत, दूसरा गंभीर रूप से घायल

क्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार शाम आतंकियों ने एक बार फिर कायरतापूर्ण हरकत करते हुए गैर-स्थानीय मजदूरों को अपना निशाना बनाया है। जिले के केल्लम इलाके में आतंकियों द्वारा की गई फायरिंग में एक मजदूर की दुखद मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है। घटना के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों की तलाश में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

पीड़ितों की पहचान
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों पीड़ित छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। इस आतंकी हमले में दीपक नाम के मजदूर की जान चली गई, जबकि भूपेंद्र गंभीर रूप से घायल है। हमले के तुरंत बाद दोनों घायलों को पास के अस्पताल ले जाया गया। वहां दीपक ने दम तोड़ दिया, वहीं भूपेंद्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे विशेष चिकित्सा देखभाल के लिए जीएमसी अनंतनाग रेफर कर दिया गया है।

सर्च ऑपरेशन और सुरक्षाबलों की कार्रवाई
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में गैर-स्थानीय श्रमिकों को निशाना बनाने की धमकियों और हमलों की रिपोर्ट के बाद सुरक्षा चिंताएं पहले से ही बढ़ी हुई हैं। इन खतरों के मद्देनजर, सुरक्षाबलों की संयुक्त टीमों ने दक्षिण कश्मीर के कई हिस्सों में पहले ही निगरानी तेज कर दी थी और कई जगह चेकपॉइंट बनाए गए थे।

घेराबंदी और तलाशी
सुरक्षाबलों ने तेजी से पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है और आतंकियों का सुराग लगाने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है ताकि आतंकी भागने में सफल न हो सकें। ऑपरेशन की सीधे तौर पर निगरानी करने और स्थिति का जायजा लेने के लिए वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं।

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घाटी में खौफ पैदा करने की साजिश
यह हमला जम्मू-कश्मीर में पहले से हो रही ‘टारगेट किलिंग’ की घटनाओं की ही एक और कड़ी है। आतंकी मुख्य रूप से प्रवासी मजदूरों, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों और निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाकर अपनी हताशा दिखा रहे हैं। इस तरह के हमलों का मुख्य उद्देश्य घाटी में काम कर रहे बाहरी लोगों में दहशत का माहौल पैदा करना और क्षेत्र की शांति व विकास को बाधित करना है।

अनंतनाग में भी हुआ था आतंकी हमला
दक्षिण कश्मीर में गैर-स्थानीय नागरिकों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अनंतनाग जिले में एक बड़ा आतंकवादी हमला देखने को मिला था। अनंतनाग में सबसे हालिया आतंकवादी हमला 22 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे हुआ था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था।

वह हमला दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग शहर के व्यस्त और मुख्य बाजार लाल चौक पर हुआ था। उस हमले में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के बहादुर हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी निशाना बने थे और देश की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए थे। बाद में कुख्यात आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े शैडो ग्रुप द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने अनंतनाग में हुए उस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

 

हमले के बाद सुरक्षा बलों को कार्रवाई तेज करने के निर्देश
आतंकी हमले के बाद उपराज्यपाल ने डीजीपी श्री नलिन प्रभात और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत कर हालात की जानकारी ली। उन्होंने छत्तीसगढ़ के एक मजदूर की मौत पर गहरा दुख जताते हुए इस हमले की कड़ी निंदा की।

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उपराज्यपाल ने सुरक्षा बलों को आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज करने और हमले में शामिल आतंकियों को खत्म करने के निर्देश दिए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

हमले में घायल छत्तीसगढ़ के एक अन्य मजदूर को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। उपराज्यपाल ने मृतक मजदूर के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायल के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पूरा देश पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। सुरक्षा एजेंसियां हमले के जिम्मेदार आतंकियों की तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं।

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