तेल पाइपलाइन कांड: हमला सऊदी पर, राज खुला इराक से और शक ईरान पर, अब किसने बढ़ाई पश्चिम एशिया की चिंता?

सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए हमले को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इराक ने जांच के बाद माना है कि सऊदी पाइपलाइन पर हमले उसके माइसां प्रांत से किए गए थे। यह प्रांत ईरान की सीमा से लगा हुआ है। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने माइसां प्रांत के ऑपरेशंस कमांड की जांच के आदेश दिए थे। जांच के बाद कमांडर को पद से हटा दिया गया।

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन इतनी महत्वपूर्ण क्यों?
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद अहम है। ईरान के साथ युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही प्रभावित होने के बाद इस पाइपलाइन का महत्व और बढ़ गया। यह पाइपलाइन सऊदी तेल को लाल सागर के बंदरगाह तक पहुंचाती है, जहां से आगे उसका निर्यात किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, पाइपलाइन के अंतिम छोर वाले लाल सागर बंदरगाह से सऊदी तेल निर्यात दोगुने से ज्यादा हो चुका है।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में परेशानी के बीच पाइपलाइन सऊदी तेल निर्यात का अहम रास्ता बनी है।
  • लाल सागर के रास्ते तेल भेजने की क्षमता बढ़ने से इसका रणनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।
  • क्षेत्रीय अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि हूती विद्रोहियों और इराकी मिलिशिया ने हाल में सऊदी तेल ठिकानों पर हमलों के लिए आपस में समन्वय किया है।

 

क्या अमेरिका ने हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी पाइपलाइन हमले के पीछे ईरान के होने की संभावना जताई है। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि ईरान इस हमले के पीछे है, तो ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि वे हैं। संभवतः वे ही हैं।’ डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके प्रशासन की हूतियों के साथ बातचीत हुई है। उन्होंने बताया कि हूतियों ने अमेरिका से संपर्क किया था और वे अमेरिका से लड़ना नहीं चाहते। ट्रंप के मुताबिक, हूती चाहते हैं कि अमेरिका इस मामले में शामिल न हो और वे ज्यादातर जहाजों को गुजरने दे रहे हैं।

यमन में अचानक क्यों बढ़ा विस्थापन?
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की तेज बढ़त ने हालात बिगाड़ दिए हैं। उनका बढ़ता नियंत्रण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के लिए भी चिंता बढ़ा रहा है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर अहम समुद्री रास्ता माना जाता है। हूतियों की बढ़त के बीच हजारों लोगों ने अपना घर छोड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के मुताबिक, जुलाई से अब तक कम से कम 76,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। कुछ दिन पहले यह आंकड़ा 46,000 था। एडेन में लोगों ने विस्थापित परिवारों के लिए अपने घर तक खोल दिए हैं। कुछ लोगों ने बताया कि वे इतनी घबराहट में भागे कि उन्हें यह तक पता नहीं था कि जाना कहां है।

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एक महिला ने बताया कि भागते समय मोटरसाइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई और वह, उसके पति और बच्चे घायल हो गए। वहीं, एक अन्य महिला ने बताया कि उसकी गर्भवती बेटी अस्पताल में भर्ती है और कोमा में है। लोगों को डर है कि कहीं 2022 के युद्धविराम के बाद फिर से गृहयुद्ध जैसे हालात न लौट आएं।

पश्चिम एशिया में इसके साथ और क्या-क्या हो रहा?
सऊदी पाइपलाइन हमले के अलावा पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर तनाव और बातचीत दोनों चल रहे हैं। लेबनान और इस्राइल के वार्ताकार अक्तूबर में रोम में अमेरिका की मध्यस्थता में फिर बातचीत करेंगे। इससे पहले इस महीने होने वाली बैठक टाल दी गई थी। अगले सप्ताह दोनों देशों के अमेरिका में राजदूत भी वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग में मुलाकात करेंगे।

 

 

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। उधर, ओमान और ईरान के पास तेल रिसाव का खतरा बढ़ा है। ग्रीनपीस जर्मनी के मुताबिक, अमेरिकी सेना की ओर से निशाना बनाए गए एक टैंकर से जुड़ा तेल रिसाव एक दिन में दोगुना हो गया और करीब 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैल गया।

इसके अलावा दो और बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं:

  • पश्चिमी तट में इस्राइली सैनिकों की गोलीबारी में एक फलस्तीनी घायल हुआ; इस्राइली सेना ने वीडियो को वास्तविक माना और घटना की समीक्षा की बात कही।
  • सीरिया के ऊर्जा मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में जारी युद्ध के कारण देश तेल उत्पादों के संकट से जूझ रहा है, जिससे पहले से मौजूद ऊर्जा समस्याएं और बढ़ गई हैं।
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