यमुना एक्सप्रेस-वे पर लागू हुई नई व्यवस्था,टोल पर रोक-रोककर निकाले जाएंगे वाहन, लगेगी रंबल स्ट्रिप्स…

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मुना एक्सप्रेस वे पर भीषण हादसा हुआ। सात डबल डेकर और एक रोडवेज सहित आठ बसें और तीन कारों की टक्कर के बाद आग लग गई। हादसे में 13 यात्रियों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद यमुना एक्सप्रेस-वे पर नई व्यवस्था लागू की गई है।

एडीजी आगरा जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि 23 दिसंबर को बैठक की जाएगी। इसमें आगरा अलीगढ़ रेंज के डीआईजी को बुलाया जाएगा। इसके साथ ही हाईवे और यमुना एक्सप्रेस वे अथारिटी के अधिकारी भी रहेंगे। सोमवार को ही दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं। इनमें गति निर्धारण के लिए रंबल स्ट्रिप्स लगवाने के लिए कहा गया है। लेन की पहचान के लिए सफेद पट्टी ठीक होनी चाहिए।

 

इसकी भी जिम्मेदारी एक्सप्रेसवे अथाॅरिटी की है। सड़क के बारे में बताने के लिए एलईडी लगाई जाएं। चालकों को भी जागरूक करना होगा कि गाड़ियों के बीच में दूरी होनी चाहिए। इसके लिए टोल पर ही वाहनों को कुछ देरी से निकाला जाए। वाहन एक साथ ब्रेक न लगाएं। इससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। कोहरे में हाईबीम लाइट का प्रयोग न किया जाए। वाहन ओवरटेक नहीं करें। इंडीकेटर का प्रयोग करें। वाहन रोकें तो पार्किंग लाइट को चालू कर दें।

कोहरे में रफ्तार बन गई जानलेवा
यमुना एक्सप्रेस-वे पर कोहरे में वाहनों के पीछे से टकराने के मामले ज्यादा हैं। सड़क हादसों के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 से 2023 के बीच घने कोहरे के कारण यमुना एक्सप्रेस-वे पर ही 338 सड़क दुघर्टनाएं हो चुकी हैं। इनमें 75 लोगों की मौत हुई और 665 से अधिक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और नेशनल हाईवे का आंकड़ा जोड़ लें तो स्थिति बेहद भयावह है। अधिवक्ता केसी जैन के मुताबिक मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 में राज्य सरकार सुरक्षा, सुविधा के लिए सड़क पर आवागमन नियंत्रित या अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर सकती है। घने कोहरे में जब शून्य दृश्यता हो तो आवागमन बंद किया जाना चाहिए।
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आगरा से भी गईं दमकल
सीएफओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि हादसे की जानकारी पर आगरा से भी दमकल को भेजा गया था। दमकलकर्मियों ने आग बुझाने में मदद की।

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