New Rules: यूजर्स ध्यान दें!, सिर्फ 50 बार ही कर पाएंगे बैलेंस चेक, जल्द बदलने वाले हैं ये 5 नियम

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नपीसीआई द्वारा 21 मई, 2025 को जारी सर्कुलर के अनुसार, सभी बैंक और पीएसपी को 10 सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले यूपीआई एपीआई पर निगरानी और नियंत्रण लागू करना होगा। इनमें बैलेंस चेक, ऑटोपे मेंडेट, ट्रांजेक्शन स्टेटस upiचेक जैसे अनुरोध शामिल हैं। ये बदलाव 1 अगस्त, 2025 से लागू होंगे।

 

हर दिन सीमित बार ही कर सकेंगे बैलेंस चेक
नई गाइडलाइन के तहत, यूपीआई यूजर्स एक दिन में अधिकतम 50 बार बैलेंस चेक कर सकेंगे। यानी अगर कोई ग्राहक PhonePe और Paytm दोनों इस्तेमाल करता है, तो वह हर एप पर अब सिर्फ 50 बार ही बैलेंस चेक कर पाएगा। बैलेंस चेक पर लिमिट का उद्देश्य है कि यूपीआई एप ठीक तरह काम कर पाए। बार-बार बैलेंस चेक करने से यूपीआई के सर्वर पर लोड बढ़ता है जिससे सिस्टम स्लो हो जाता है।

 

सिर्फ नॉन-पीक ऑवर्स में होंगे ऑटोपे मेंडेट
यूपीआई के जरिए लगाए गए ऑटोपे मेंडेट जैसे नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन, SIP आदि के भुगतान अब सिर्फ नॉन-पीक ऑवर्स में ही प्रोसेस किए जाएंगे। NPCI ने पीक टाइम को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे और शाम 5 बजे से रात 9:30 बजे तक निर्धारित किया है। इन समयों में सिस्टम-जनरेटेड एपीआई को सीमित या बंद किया जाएगा।

 

बैंक भेजेंगे ट्रांजेक्शन के साथ बैलेंस अलर्ट
एनपीसीआई ने निर्देश दिए हैं कि ट्रांजेक्शन के बाद बैंकों को ग्राहक को उपलब्ध बैलेंस की जानकारी भी भेजनी होगी। इसके अलावा, पीक आवर्स में बार-बार बैलेंस चेक करने से रोकने के लिए यूपीआई एप्स को विशेष तकनीकी इंतजाम करने होंगे। इससे यूपीआई की कोर इंफ्रास्ट्रक्चर स्थिर और सभी के लिए सुलभ बनी रहेगी।
नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि जो बैंक या पीएसपी इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ API ब्लॉकिंग, जुर्माना, नए ग्राहकों का ऑनबोर्डिंग रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। इसके साथ ही सभी PSP को 31 अगस्त, 2025 तक एक अंडरटेकिंग NPCI को जमा करनी होगी जिसमें वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी सिस्टम-जनरेटेड एपीआई को “क्यू” किया जाएगा और उनकी रफ्तार सीमित की जाएगी।
यूजर्स को मिलेगा रियल टाइम बैलेंस अपडेट 
एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि इन नए नियमों के लागू होने के बाद भी ग्राहकों को उनके खाते की रियल टाइम और अपडेटेड बैलेंस जानकारी मिलती रहेगी। इससे बार-बार बैलेंस चेक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और यूपीआई नेटवर्क की कार्यक्षमता भी बनी रहेगी।

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