नक्सली को करना होगा आत्मसमर्पण,नहीं चलेगी एक भी गोली, अमित शाह ने ठुकराया संघर्ष विराम का प्रस्ताव

Spread the love

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को भारत में नक्सल को खत्म करने के अपने संकल्प को दोहराया। साथ ही जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार की सख्त नीति पर जोर दिया। शाह ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार नक्सलियों के सीजफायर प्रस्ताव को खारिज करती है। उन्होंने कहा कि अगर नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहते हैं तो उनका स्वागत है, लेकिन कोई सीजफायर नहीं होगा।

अमित शाह ने कहा कि हाल ही में एक पत्र लिखकर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई कि अब तक जो हुआ वह गलती थी और अब सीजफायर कर आत्मसमर्पण किया जाएगा। शाह ने कहा कि मैं साफ कहना चाहता हूं कि कोई सीजफायर नहीं होगा। अगर आत्मसमर्पण करना है तो हथियार डाल दें, एक भी गोली नहीं चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों के लिए लाल कालीन बिछा है।

वामपंथी दलों को भी लिया आड़े हाथ
बता दें कि शाह ‘नक्सल मुक्त भारत’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने वामपंथी दलों को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि उन्होंने नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद विकास की कमी से नहीं, बल्कि ‘लाल आतंक’ के कारण फैला, जिसकी वजह से कई क्षेत्रों में दशकों तक विकास नहीं पहुंच पाया।
 

नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य पर जोर
शाह ने कहा कि भारत 31 मार्च 2026 तक भारत नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि नक्सलवाद की समस्या केवल हथियारबंद लड़ाई तक सीमित नहीं है। यह समस्या समाज में बनी विचारधारा और उसे मिलने वाले समर्थन से जुड़ी है।

और पढ़े  सुप्रीमकोर्ट का अहम फैसला- अब भारतीय सेना की महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन

शाह ने नक्सलवाद के विचार के हमले करने की सरकार की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि  बहुत से लोग सोचते हैं कि नक्सलवाद की समस्या हथियारबंद गतिविधियों के खत्म होते ही खत्म हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं है। नक्सलवाद क्यों पैदा हुआ, कैसे बढ़ा और विकसित हुआ?

अमित शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि नक्सलवाद के पीछे कौन लोग हैं जिन्होंने विचारधारा, कानूनी और वित्तीय मदद दी? जब तक भारतीय समाज इस बात को समझेगा नहीं, तब तक नक्सलवाद से लड़ाई खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में समाज की सोच और उससे जुड़े लोगों को समझना जरूरी है।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर भारत की सख्त नीति
इसके साथ ही अमित शाह ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ सरकार की सख्त और योजनाबद्ध नीति की सफलता पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद वहां सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है।

पहली बार हुए पंचायत चुनाव का जिक्र
अमित शाह ने बताया कि सुरक्षा बलों के शहीद होने वाले मामलों में 65% और नागरिकों की मौत में 77% की कमी आई है। आज वहां हर कानून पूरी तरह लागू हो रहा है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव हुए हैं। पहले यहां सांसद चुनने के लिए 10,000 वोट भी नहीं पड़ते थे क्योंकि चुनावों का बहिष्कार होता था। लेकिन अब जिला और तालुका पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 99.8% मतदान हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि जम्मू-कश्मीर में अब लोकतंत्र मजबूत हो रहा है और सामान्य जीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है।

और पढ़े  9 लोगों की मौत- गहरी नींद में थे, नहीं मिला जान बचाने का मौका, सबसे आखिरी में निकाले इन दोनों के शव

Spread the love
  • Related Posts

    पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में PM मोदी बोले- होर्मुज में तनाव चिंताजनक

    Spread the love

    Spread the loveप्रधानमंत्री आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर राज्यसभा में जानकारी दे रहे हैं। इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में अपनी बात रखी थी। प्रधानमंत्री मोदी…


    Spread the love

    दिल्ली में CM रेखा का पहला बजट- पेश किया 1.03 लाख करोड़ का बजट, जानें क्या-क्या हुए एलान

    Spread the love

    Spread the loveदिल्ली विधानसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार आज दिल्ली का वार्षिक बजट पेश कर रही है। दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27…


    Spread the love