नैनीताल- Accident: सफर बना आखिरी…पति-बच्चों के सामने खाई में गिरीं 2 मांएं, ऐसे हुआ हादसा

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नैनीताल की खुशनुमा यादें समेटकर लौट रहे मेरठ के एक ही परिवार के 29 लोगों के लिए यह ट्रिप कभी न भुलाने वाली बन गई। वाहन का ब्रेक फेल होने के बाद चालक नईम का डिवाइडर से टकराकर गाड़ी रोकने का प्रयास नाकाम रहा। इसके बाद टेंपो ट्रैवलर डिवाइडर तोड़ते हुए पेड़ से टकराकर खाई की ओर झुक गया। हादसे में गाड़ी का शीशा टूट गया और नाज़मीन और फरद बेगम अपने परिजनों के सामने ही सीधे गहरी खाई में जा गिरीं, जिससे उनकी मौत हो गई।

Two women died after a vehicle fell into a gorge in kaladhungi

मेरठ के इस्लामाबाद काला फैक्टरी इलाके के रहने वाले आपस में रिश्तेदार कई परिवारों ने मिलकर नैनीताल घूमने का प्लान बनाया था। सभी ने दिनभर नैनीताल में बोटिंग की। शाम को जब वे वापस लौट रहे थे तभी कालाढूंगी से ठीक पहले अचानक वाहन के ब्रेक फेल हो गए। एसटीएच में भर्ती घायल चालक नईम ने पुलिस को बताया कि ब्रेक फेल होते ही उसने गाड़ी को नियंत्रित करने का पूरा प्रयास किया। गाड़ी की रफ्तार बढ़ती देख उसमें सवार 29 लोगों की सांसें अटक गईं। कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग के आखिरी प्रिया बैंड के पास नईम ने गाड़ी रोकने के लिए उसे डिवाइडर से टकराया लेकिन रफ्तार तेज होने के कारण डिवाइडर टूट गया और वाहन सीधे पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि पीछे बैठे लोग आगे की ओर आ गए जिससे शीशा टूटा और दोनों महिलाएं खाई में गिर गईं। पीछे मौजूद लोगों ने उनका हाथ थामने की कोशिश भी की लेकिन वे उन्हें बचा नहीं सके।

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हादसे के बाद धमोला निवासी अजय और जैक्सन स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे और तत्काल राहत कार्य शुरू किया। उन्होंने बताया कि मौके पर चीखपुकार मची हुई थी और महिलाएं व बच्चे बेहद डरे हुए थे। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से गाड़ी में फंसे 27 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे। अजय और जैक्सन ने तत्परता दिखाते हुए अपनी ही कार से घायलों को सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) पहुंचाया जबकि कुछ अन्य घायलों को एंबुलेंस के जरिये अस्पताल लाया गया। एसटीएच के चिकित्सक डॉ. दीपक जोशी के अनुसार, अस्पताल में कुल 21 घायलों को लाया गया है जिनमें 9 महिलाएं, 10 पुरुष और 2 बच्चे शामिल हैं। इनमें से आधा दर्जन यात्रियों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं जिनका सीटी स्कैन कराया गया है। फिलहाल सभी घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। छह घायलों का कालाढूंगी के स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। बता दें कि कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग पर प्रिया बैंड (अंधे मोड़) को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। पूर्व में भी यहां कई वाहन हादसे का शिकार हो चुके हैं।

 

एसटीएच प्रशासन हाईअलर्ट पर रखा
हादसे की गंभीरता को देखते हुए एसटीएच प्रशासन को तुरंत हाईअलर्ट पर रखा गया। सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी भी हालात का जायजा लेने अस्पताल पहुंचे। अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में बेड खाली करवाए और डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की टीम ने बिना वक्त गंवाए घायलों का इलाज शुरू कर दिया। इस दौरान पूरा अस्पताल परिसर घायलों और उनके परिजनों की चीखपुकार से गूंज उठा। कोई अपने बच्चों को संभाल रहा था तो कोई अपनों की सलामती के लिए पुलिस और डॉक्टरों से गुहार लगा रहा था।

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प्रिया बैंड पर हुए हादसे

  • 19 मई 2024 : टेंपो-ट्रैवलर 19 लोगों को लेकर दिल्ली जा रहा था। प्रिया बैंड पर ब्रेक फेल होने से वाहन पलट गया। हादसे में करोलबाग और मोतीनगर के रहने वाले नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
  • 14 दिसंबर 2024 : नोएडा से एचसीएल कंपनी के कर्मचारी निजी यात्रा पर टेंपो-ट्रैवलर से नैनीताल आए। चालक उमेश के अनुसार ब्रेक फेल होने से वाहन पलट गया। हादसे में 28 वर्षीय सयोनी और 23 वर्षीय जया की मौत हुई।
  • 28 दिसंबर 2024 : महाराष्ट्र के ठाणे के एक ही परिवार के लोग टेंपो-ट्रैवलर से नैनीताल आए। यहां से दिल्ली वापस जाते समय ब्रेक फेल होने से वाहन पलट गया। हादसे में चालक सहित 16 लोग घायल हुए।

 

ओवरलोड वाहन हादसे के बाद परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल
टेंपो ट्रेवलर हादसे में परिवहन व्यवस्था और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन (24 सीटर) में क्षमता से अधिक सवारियां थीं। यह वाहन नैनीताल से कालाढूंगी तक का सफर तय कर चुका था। इस दौरान रास्ते में किसी भी चौकी या परिवहन विभाग के अधिकारियों की नजर इस वाहन पर नहीं पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन सीजन में ओवरलोड वाहनों का संचालन आम बात है। जिम्मेदार विभाग अक्सर कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बने रहते हैं। यदि समय रहते वाहन की जांच की जाती तो शायद यह हादसा टल सकता था। स्थानीय लोगों ने मामले में संबंधित विभागों की लापरवाही पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ओवरलोडिंग पर रोक न लगने से ऐसे हादसे होते हैं।

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