शुक्लागंज में गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के सहजनी रेलवे क्रॉसिंग के पास कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग ट्रैक पर सोमवार रात करीब नौ बजे पिता-पुत्री के शव पड़े मिले। घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर पर लावारिस कार भी पुलिस को मिली है। कार के अंदर दो पर्स और दो मोबाइल पड़े थे। कार लॉक थी।
इसके बाद आरपीएफ, जीआरपी और गंगाघाट कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों शव ट्रैक पर तीन मीटर के फासले पर अलग-अलग पड़े मिले। किशोरी का सिर और बायां हाथ धड़ से अलग हो गया था। शव रेलवे ट्रैक पर पड़े होने के कारण करीब 33 मिनट तक तेजस एक्सप्रेस सहजनी रेलवे क्रॉसिंग एवं 14 मिनट तक गोमती एक्सप्रेस गंगाघाट स्टेशन पर खड़ी रही।
कार खड़ी मिली, जो लॉक थी
आरपीएफ प्रभारी सुरजीत सिंह और जीआरपी गंगाघाट रेलवे स्टेशन प्रभारी लोकेंद्र सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया दोनों के आत्महत्या की बात सामने आ रही है। मृत युवक की कमर में चाबी का गुच्छा और किशोरी के कटे हुए बाएं हाथ में घड़ी बंधी थी। गंगाघाट कोतवाली के एसएसआई दिलीप प्रजापति ने बताया कि कार खड़ी मिली है, जो लॉक थी।
पति की मौत के सदमे में पत्नी बेहोश
कार मृतक विकास के साले कानपुर के हरबंश मोहाल कछियाना निवासी यश गुप्ता के नाम पर है। सूचना पर मृतक की पत्नी डॉली देर रात गंगाघाट थाने पहुंची। पति की मौत के सदमे में वह बेहोश हो गई। आत्महत्या क्यों की, पुलिस इस बिंदु पर जांच कर रही है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
मायके में हुआ था विवाद
विकास के ससुर राकेश अग्रहरि ने बताया कि विकास मूलरूप से कानपुर के कल्याणपुर के रहने वाले थे। मरहला चौकी इंचार्ज ने मूलचंद्र पाठक ने बताया कि थाने में डॉली चिल्ला-चिल्ला कर कह रही थी ससुराल में विवाद के बाद वह मायके चली आई थी। सोमवार को मायके में भी पति से विवाद हुआ। पुलिस का कहना है कि इसके बाद ही पिता और बेटी ने खुदकुशी कर ली।
पुलिस की लापरवाही… कमर में बंधा था चाबी का गुच्छा, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
पिता और बेटी के शव को उन्नाव पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। पिता की कमर में चाबी का गुच्छा लटक रहा था। लेकिन घटनास्थल पर पुलिस ने इसकी अनदेखी की। मौके पर कार लॉक थी। संभावना जताई जा रही है कि चाबी कार की होगी।
बहाना बनाती रही पुलिस
चालान और अपराधियों को पकड़ने के लिए यूपी पुलिस वाहनों के नंबर से उनकी कुंडली निकाल लेती है लेकिन उन्नाव पुलिस सहजनी रेलवे क्राॅसिंग के पास ट्रैक पर मिले शवों की करीब चार घंटे तक दोनों की शिनाख्त न करा पाई। कार में मोबाइल दिख रहे थे शव की कमर में चाबी थी फिर भी पुलिस ने चाबी निकालकर लाॅक नहीं खोला। वहीं, 5 जी इंटरनेट के दौर में नेटवर्क न आने का बहाना बनाती रही।
चाबी से कार का गेट खोलने का प्रयास नहीं किया
अंदेशा था कि कार की चाबी ही मृतक की कमर में लगी थी। कार के अंदर झांक कर देखने से उसमें दोनों के पर्स और मोबाइल भी पड़े मिल गए थे। हालांकि पुलिस ने चाबी से कार का गेट खोलने का प्रयास नहीं किया। न ही पुलिस एप के माध्यम से कार के मालिक का नाम पता और घर की जानकारी जुटा पाई, जबकि एप पर दिख रही कार के मालिक का नाम यश गुप्ता और कानपुर के हरबंश मोहाल कछियाना इलाके के नाम गाड़ी पंजीकृत होने की जानकारी नहीं जुटा पाई।
न एप चला न साहब के कदम
गंगाघाट थाने की पुलिस के दरोगा का कहना था कि एप नहीं चल रहा है वह मौके पर हैं। हालांकि सबसे खास बात यह रही कि न तो चार घंटे तक पुलिस के एप में नेटवर्क आया और न ही पुलिस वालों ने वहां आगे पीछे हटकर किसी और जगह से नेटवर्क लेकर एप चलवाकर देखने की कोशिश की।
चनामे की कार्रवाई टाल रहे थे
गंगाघाट के एसएसआई दिलीप प्रजापति ने बताया कि एप नहीं चल रहा है। इसलिए शव की शिनाख्त नहीं करा पा रहे हैं, जबकि घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि पुलिस, जीआरपी दोनों एक-दूसरे पर पंचनामे की कार्रवाई टाल रहे थे। दोनों घंटों तक नेटवर्क न आने और एप न चलने का बहाना बनाते रहे।








