हड़बड़ी में मुहम्मद यूनुस-: चुनाव से तीन दिन पहले अमेरिका संग बांग्लादेश की बड़ी डील, शर्तें पूरी तरह गोपनीय

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भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर मुहर लग चुकी है। भारतीय वस्तुओं पर लगा टैरिफ भी घटकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बीच भारत पर कम टैरिफ और ट्रेड डील से पड़ोसी देश बांग्लादेश टेंशन में आ चुका है। इसलिए कथित तौर पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार चुनाव से ठीक तीन दिन पहले अमेरिका संग ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने जा रही है। देश के वाणिज्य सचिव महबूबुर रहमान ने हस्ताक्षर की तारीख की पुष्टि की है।

 

बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने जा रहे हैं। जो कि शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद पहली बार है। इस बीच देश का ध्यान अब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर केंद्रित हो गया है। भारत के साथ बनी अमेरिकी की सहमति के बाद बांग्लादेश ने भी समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तेजी से प्रयास किए हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था वस्त्र निर्यात उद्योग (आरएमजी) के निर्यात पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जो उसके अमेरिकी निर्यात का करीब 90 फीसदी है।

 

भारत से अमेरिकी बाजार खोने का डर 
दरअसल, बांग्लादेश को डर है कि अगर वह समान रूप से या फिर कायदे की शर्तें नहीं भुना पाया तो वह प्रतिस्पर्धा में भारत से अपना बाजार हिस्सा खो सकता है। बांग्लादेश वर्तमान में अमेरिका से 20 फीसदी टैरिफ का सामना कर रहा है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल 2025 में घोषित किए गए 37 फीसदी के भारी शुल्क से कम कर दिया गया। अगस्त में राष्ट्रपति ने अगली पारस्परिक शुल्क घोषणा के तहत नए शुल्कों को संशोधित किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार टैरिफ को और कम करके 15 फीसदी करने की कोशिश कर रही है। हालांकि इस समझौते की शर्तों को लेकर अस्पष्टता ने बांग्लादेश के व्यापारियों को चिंतित कर दिया है। देश के घरेलू बाजार के व्यापारियों का भी यही मानना है कि यह समझौता चुनावों के बाद हस्ताक्षरित किया जा सकता था, जिससे इसके नियमों और विभिन्न क्षेत्रों पर इसके प्रभावों के बारे में अधिक स्पष्टता होती।

समझौते की गोपनीयता पर उठे सवाल
टैरिफ वार्ता और व्यापार समझौते के विवरण को गोपनीय रखने के लिए राष्ट्रीय एवं आवासीय समझौते (एनडीए) पर कथित तौर पर जून 2025 में हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के कुछ महीनों बाद ही अमेरिका ने बांग्लादेश पर आयात शुल्क घटाकर 20 फीसदी कर दिया था। बांग्लादेश और अमेरिका के बीच आयात-निर्यात में भारी असमानता है। प्रोथोम आलो (बंगाली दैनिक समाचार पत्र ) के अनुसार, ढाका अमेरिका से लगभग 2 अरब डॉलर का सामान आयात करता है, जबकि बदले में वह 6 अरब डॉलर का सामान निर्यात करता है।

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खबरों के मुताबिक अमेरिका बांग्लादेश को निर्यात बढ़ाकर इस अंतर को पाटना चाहता है। अखबार में आगे कहा गया है कि गेहूं, सोयाबीन तेल, मक्का और कपास जैसे उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के अलावा, वाशिंगटन चाहता है कि बांग्लादेश अमेरिका से अधिक सैन्य उपकरण खरीदे और चीन पर अपनी निर्भरता कम करे।  इसी के साथ अमेरिका बांग्लादेशी बाजार में बिना किसी अतिरिक्त निरीक्षण के अपनी कारों की आसान पहुंच भी चाहता है।


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