तेहरान पर हमले में कई ईरानी अधिकारी मारे गए’, धमकियों के बाद ट्रंप का एक और बड़ा दावा, समझिए कैसे बढ़ी चिंता?

श्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 38वें दिन में प्रवेश कर रहा है और पूरे क्षेत्र में तनाव अब भी चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा सामने आया है। उन्होंने कहा कि तेहरान में हुए एक बड़े हमले में ईरान के कई सैन्य अधिकारी मारे गए हैं।

 

ट्रंप ने यह बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर किए गए पोस्ट के जरिए कही। इस पोस्ट में उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें धमाकों और लड़ाकू विमानों की आवाजें सुनाई देती हैं। हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि हमला किन ठिकानों पर हुआ और कितनी क्षति हुई। अभी तक ईरान की ओर से भी इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में हमले में कितने बड़े अधिकारी मारे गए, यह साफ नहीं है।

 

 

संघर्ष के बीच ट्रंप की चेतावनी कितनी असरदार?
बता दें कि ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और पिछले कुछ हफ्तों में सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं। इसी बीच ट्रंप ने ईरान को एक सख्त चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान के पास 48 घंटे का समय है या तो समझौता करे या फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल दे, नहीं तो भारी तबाही का सामना करना पड़ेगा।

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ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार
दूसरी ओर ट्रंप के इस चेतावनी पर ईरान ने भी जोरदार पलटवार किया है। ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी को खारिज कर दिया है। ईरान के जनरल अली अब्दोल्लाही अलीआबादी ने कहा कि ट्रंप की यह चेतावनी बेबस, घबराई हुई, असंतुलित और मूर्खतापूर्ण कार्रवाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संदेश का सरल मतलब यह है कि नरक के द्वार आपके लिए खुल जाएंगे।

 

ट्रंप पहले दी 10 दिनों का अल्टीमेटम दे चुके
इससे पहले ट्रंप ईरान को 10 दिन का अल्टीमेटम दे चुके थे। उन्होंने 26 मार्च को यह भी कहा था कि बातचीत को मौका देने के लिए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले 10 दिन के लिए रोके जा रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला ईरान के कहने पर लिया गया था और बातचीत अच्छी चल रही थी।


होर्मुज को लेकर चिंता अभी भी वैश्विक चिंता बरकरार

गौरतलब है कि बीते एक महीने से भी ज्यादा समय से चल रहे पश्चिम एशिया संघर्ष ने एक साथ कई सारी वैश्विक चिंताओं को जन्म दे दिया है। इसका बड़ा कारण होर्मुज है। दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम रास्ता है। इसे लेकर अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है। अब ट्रंप का नया 48 घंटे का अल्टीमेटम इस पूरे विवाद को और गंभीर बना रहा है। हालात को देखते हुए क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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