रामजानकी आश्रम के महंत सुरेंद्र दास का निधन,जिस आश्रम का किया निर्माण, उसमें शव नहीं जाने दिया…

Spread the love

 

 

मैनपुरी के किशनी क्षेत्र के जटपुरा चौराहे के पास स्थित रामजानकी आश्रम के महंत 80 वर्षीय सुरेंद्र दास का बृहस्पतिवार रात निधन हो गया। वह नगला अहिर, थाना एलाऊ के रहने वाले थे। उनकी मौत के बाद आश्रम परिसर में तनाव का माहौल बन गया। दरअसल, अनुयायी महंत के शव को आश्रम में ले जाने पहुंचे, तो आश्रम में ताला लगा मिला और अंदर मौजूद लोगों ने शव को भीतर लाने से मना कर दिया। इस घटना के बाद, पोस्टमार्टम कराकर लौटे अनुयायी आश्रम के बाहर ही धरने पर बैठ गए।

 

महंत सुरेंद्र दास का निधन बृहस्पतिवार रात को एक भागवत कथा कार्यक्रम में हुआ था। शुक्रवार सुबह जब उनके अनुयायी शव लेकर रामजानकी मंदिर पहुंचे, तो गेट पर ताला लगा था और अंदर मौजूद लोगों ने शव को प्रवेश नहीं करने दिया। शिष्यों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद तहसीलदार मौके पर पहुंचे।

 

महंत के शिष्यों ने आरोप लगाया है कि आश्रम और उससे लगी 18 बीघा भूमि पर कब्जे की साजिश के चलते ही महंत ने प्राण त्यागे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बाबा के भेष में औरैया जनपद के अछल्दा थाना क्षेत्र का एक हिस्ट्रीशीटर भी आश्रम में मौजूद है, जिसके खिलाफ कई शिकायतें होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन आरोपों के बाद, महंत के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। पोस्टमार्टम के बाद अनुयायी शव को लेकर फिर से आश्रम पर पहुंचे और उसे बाहर ही रख दिया। सूचना मिलने पर एसडीएम गोपाल शर्मा और सीओ भोगांव सत्यप्रकाश शर्मा भी मौके पर पहुंच गए।

और पढ़े  New Rule: आज से टोल प्लाजा पर कैश को लेकर बदल गया नियम, जान लें वरना होगी दिक्कत-जुर्माना

रामजानकी मंदिर के अध्यक्ष तहसीलदार घासीराम ने विवादित जमीन का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार आश्रम के अंदर करने से मना कर दिया। एसडीएम ने एक फर्द में मृतक सुरेंद्र दास का नाम होने के कारण उन्हें मंदिर से बाहर, जमीन पर अंत्येष्टि करने की अनुमति दी, लेकिन शिष्य इस पर राजी नहीं हुए। उनकी मांग थी कि आश्रम के अंदर रह रहे अन्य साधु को पहले बाहर निकाला जाए। इस पर एसडीएम ने तीन दिन का समय मांगा है, लेकिन अनुयायी अपनी मांग पर अड़े रहे और आश्रम के बाहर धरने पर बैठे रहे।

महंत ने किया था आश्रम का नवनिर्माण
दिवंगत महंत सुरेंद्र दास के अनुयायियों के अनुसार, महंत ने वर्ष 1960 में तपस्वी जीवन अपनाकर इस जर्जर प्राचीन आश्रम में प्रवेश किया था। तभी से उन्होंने इसका संरक्षण शुरू किया और आश्रम का नवनिर्माण कराया था। आश्रम की करीब 18 बीघा भूमि पर लगातार कुछ अराजक तत्वों द्वारा कब्जे की कोशिश की जा रही है।

Spread the love
  • Related Posts

    अयोध्या- कानपुर के चिकित्सक दल का आईएमए ने किया स्वागत

    Spread the love

    Spread the love   कानुपर के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की 50 सदस्यीय टीम शनिवार को अयोध्या पहुंची। इस दौरान आईएमए की अयोध्या इकाई के अध्यक्ष डॉ. आशीष श्रीवास्तव के…


    Spread the love

    UP- ‘मियां एक भी नहीं, नाम मियांपुर’, CM योगी ने बदला लखीमपुर खीरी के गांव का नाम

    Spread the love

    Spread the loveलखीमपुर खीरी के मोहम्मदी तहसील क्षेत्र के मियांपुर गांव का नाम बदलकर अब रविंद्र नगर किया जाएगा। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मियांपुर में आयोजित…


    Spread the love