लोकल फॉर वोकल – व्यापारियों ने किया दावा देशभर में हुआ 500 करोड़ रुपये का व्यापार,हर घर तिरंगा अभियान ने दिया हजारों लोगों को रोजगार

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हर घर तिरंगा अभियान लोकल फॉर वोकल व आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी रफ्तार दे रहा है। राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री ने उन तमाम लोगों के चेहरे पर मुस्कान दिया है जो अपना गुजर बसर करने के लिए परेशान थे। चाहें वह नुक्कड़ पर भीख मांग कर जीवन गुजारने वाला हो या कपड़ा सिलने वाला। कपड़ा मील मालिक से लेकर फैक्टरी के श्रमिकों को भी रोजी-रोटी को बेहतर करने का अवसर दिया है। इसकी बानगी इस रूप में देखी जा सकती है कि हर घर तिरंगा से पूरे देश में 500 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ है तो हजारों लोगों को पिछले 15 दिनों से रोजगार के भटकना नहीं पड़ा है। दिल्ली-एनसीआर की बात करें तो 150-200 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ है।

भारतीय तिरंगा फहरा कर स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए पूरा देश नए जोश के साथ तैयार है। देश भर में इस बार 30 करोड़ से अधिक राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री हुई है तो एनसीआर में 10-12 करोड़। इस तरह से देखा जाए तो राष्ट्रभक्ति की भावना से लोग ओतप्रोत हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने दावा किया कि पिछले 20 दिनों के रिकॉर्ड समय में 30 करोड़ से अधिक तिरंगे का निर्माण किया। फ्लैग कोड में पॉलिस्टर और मशीनों से झंडे बनाने की अनुमति में किए गए बदलाव ने भी देश भर में झंडों की आसान उपलब्धता में योगदान दिया है। पहले भारतीय तिरंगे को केवल खादी या कपड़े में बनाने की अनुमति थी। अपने घर में या छोटे स्थानों पर स्थानीय दर्जी की सहायता से बड़े पैमाने पर तिरंगा झंडा बनाया। स्वराज वर्ष की घोषणा केंद्र सरकार करती है तो देश के ताने-बाने को देशभक्ति के धागे से बांधने में सहयोग मिलेगा।
कई गुने से भी अधिक बिक्री बढ़ी
पिछले वर्षों में स्वतंत्रता दिवस की तुलना की जाए तो कई गुना बिक्री में बढ़ोत्तरी हुई है। झंडे की वार्षिक बिक्री महज 150-200 करोड़ रुपये तक सीमित थी। जबकि पिछले पंद्रह दिनों में 500 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री अभी हुई है जो पंद्रह अगस्त तक बढ़कर इससे भी अधिक चली जाएगी। इसी तरह अगर देखें तो रोजगार भी बढ़ा है। व्यापारियों का दावा है कि 8-10 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है।
एनसीआर में भी जबरदस्त मांग
हर घर तिरंगा अभियान ने आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाने का काम किया है। एनसीआर में जहां 150-200 करोड़ रुपये की झंडे की बिक्री हुई है तो वहीं 10-15 लाख लोगों को रोजगार का अवसर दिया है। सिलाई करने वालों की बात करें तो हर एक कारीगर को कम से कम पिछले पंद्रह दिनों के दौरान 50,000 रुपये से 1,00000 रुपये की आय हुई है। इसी तरह इस व्यापार से जुड़े अन्य फैक्टरी श्रमिक, कपड़ा श्रमिक, बिक्रेताओं को भी रोजगार मिला है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के विधानसभा व लोकसभा चुनाव के दौरान जितनी बिक्री नहीं होती है उससे अधिक आजादी के अमृत महोत्सव पर हुई है। -गुलसन खुराना, महासचिव ऑल ओवर इंडिया ट्रेडर्स एसोसिएशन

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