लालकुआं : विधायक डॉ. मोहन बिष्ट ने लालकुआं नगर क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को सुनाया सरकार द्वारा मालिकाना हक देने का शासनादेश..

उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लालकुआं नगर क्षेत्र में निवास करने वाले 1537 परिवारों को वर्ष 2000 के सर्किल रेट के हिसाब से मालिकाना हक देने का निर्णय लेते हुए एक वर्ष का समय निर्धारित किया है। क्षेत्रीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार की देर शाम हुई कैबिनेट की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह लालकुआं नगर क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के लिए सौगात है।

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने भी दो वर्ष पूर्व 2004 के सर्किल रेट के हिसाब से मालिकाना हक देने का शासनादेश जारी किया था। धामी सरकार ने उसमें संशोधन करते हुए 2016 में जारी किए गए शासनादेश के आधार पर वर्ष 2000 के सर्किल रेट पर ही मालिकाना हक देने का निर्णय लिया है। जिसका नगर के 1537 परिवारों को लाभ पहुंचेगा। बताते चलें कि लालकुआं नगर की भूमि वर्ष 1927 में डिफॉरेस्ट हुई थी। 1975 में लालकुआं राजस्व ग्राम बना और 1978 में यहां नगर पंचायत की स्थापना की गई। तब से आज तक लालकुआं के लोगों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। दो नवंबर 2020 को वर्तमान सरकार द्वारा जारी किए गए शासनादेश में 100 वर्ग मीटर से कम भूमि वालों के लिए 2004 के सर्किल रेट का पांच प्रतिशत लेने, 101 से 200 वर्ग मीटर तक की भूमि वालों के लिए 2004 का सर्किल रेट, 201 से 400 वर्ग मीटर तक भूमि वालों के लिए वर्ष 2004 के सर्किल रेट से 10 प्रतिशत अतिरिक्त लेने का फैसला किया था। 401 से अधिक वर्ग मीटर की भूमि के नियमितीकरण के लिए 2004 के सर्किल रेट से 25 प्रतिशत अतिरिक्त धनराशि जमा करने का आदेश था। यह शासनादेश सुशील कुमार सचिव प्रभारी उत्तराखंड शासन द्वारा जारी किया गया था। इससे पूर्व पूर्ववर्ती रावत सरकार द्वारा 26 दिसंबर 2016 को जारी किए गए शासनादेश में सचिव डीएस गर्ब्याल उत्तराखंड शासन ने वर्ष 2000 के सर्किल रेट के आधार पर संक्रमणीय भूमिधरी अधिकार दिए जाने हेतु आवश्यक कार्रवाई का निर्णय लिया था। लालकुआं मालिकाना हक मामले में पूर्व में पांच बार शासनादेश जारी हुए थे। आज कैबिनेट में हुए निर्णय के बाद छठा शासनादेश जारी हो गया। धामी सरकार ने वर्ष 2016 के सर्किल रेट को ही यथावत रखने का निर्णय लिया है।

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