कैंसर: आप भी लगाते हैं छोटे बच्चों को टैल्कम पाउडर तो हो जाइए सावधान, कहीं ये बढ़ा न दे कैंसर का खतरा?

कैंसर: आप भी लगाते हैं छोटे बच्चों को टैल्कम पाउडर तो हो जाइए सावधान, कहीं ये बढ़ा न दे कैंसर का खतरा?

क्या आप अपने बच्चे को गर्मियों में टैल्कम पाउडर लगाते हैं? अगर हां तो सावधान हो जाइए, हालिया अध्ययनों में इसमें ऐसे तत्व पाए गए हैं जो कैंसर जैसे गंभीर रोगों का जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं। टैल्कम पाउडर के अलावा पहले के अध्ययनों में कई अन्य कॉस्मेटिक उत्पादों को भी गंभीर रोगों का खतरा बढ़ाने वाला पाया गया था।

हाल के वर्षों में इस बात को लेकर अध्ययनों में वैज्ञानिक चिंता जताते रहे हैं कि कई कंपनियों के टैल्कम पाउडर (बेबी पाउडर) में एस्बेस्टस नामक तत्व हो सकता है। एस्बेस्टस को शोधकर्ता गंभीर रोगों को बढ़ाने वाला मानते हैं, इससे कैंसर का भी जोखिम हो सकता है।

टैल्क और एस्बेस्टस के जोखिम
गौरतलब है कि ‘टैल्क’ धरती से निकाला जाने वाला एक खनिज है। यह नमी को सोखने और घर्षण को कम करने में बहुत फायदेमंद माना जाता है, इसलिए कॉस्मेटिक कंपनियां अक्सर इसका इस्तेमाल बेबी पाउडर, आई शैडो और अन्य उत्पादों में करती रही हैं। इसी तरह से एस्बेस्टस भी टैल्क के समान खनिजों का एक समूह है जिसका भी खनन किया जाता है। यह अक्सर टैल्क वाले क्षेत्र में ही पाया जाता है।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया, एस्बेस्टस सांस के साथ अगर शरीर के अंदर चला जाए तो ये कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है, इसलिए कॉस्मेटिक कंपनियों के लिए खनन स्थलों को सावधानी से चुनना और टैल्क का नियमित रूप से परीक्षण करना महत्वपूर्ण है।

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पाउडर में हो सकते हैं कार्सिनोजेनिक तत्व
वैज्ञानिकों का कहना है कि जो लोग अक्सर पाउडर का इस्तेमाल करते हैं, उनमें इसके सांस के माध्यम से शरीर से भीतर जाने की आशंका अधिक होती है। ये शरीर में कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर पर शोध करने वाली अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी ने इसे कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाला) के रूप में भी सूचीबद्ध किया है।

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि टैल्क के खनन और प्रसंस्करण में शामिल लोगों में इन हानिकारक तत्वों के कारण कैंसर का जोखिम अधिक हो सकता है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह खनिजों के कारण होता है या भूमिगत अन्य चीजों के कारण।

ओवेरियन और पेट के कैंसर का भी खतरा
टैल्कम पाउडर और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों को लेकर किए गए कई अध्ययनों के परिणाम मिले-जुले रहे हैं। अध्ययनकर्तांओं ने बताया कि टैल्क कुछ खास आयु वर्ग के लोगों में ओवेरियन कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है। कुछ अध्ययनों में इसके कारण पेट के कैंसर का जोखिम भी बताया जाता रहा है हालांकि इसकी पुष्टि के लिए अभी और अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि टैल्क-आधारित पाउडर बनाने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों को लेकर हजारों मुकदमों का सामना भी करना पड़ा है।

तो क्या नहीं करना चाहिए पाउडर का इस्तेमाल?
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स बच्चों के लिए किसी भी तरह के पाउडर का इस्तेमाल न करने की सलाह देता है चाहे वह टैल्क आधारित हो या नहीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं किसी भी प्रकार का पाउडर के कणों के सांस के माध्यम से शरीर में जाने से बच्चों को फेफड़ों से संबंधित दिक्कतें हो सकती हैं।

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विशेषज्ञ कहते हैं, टैल्कम पाउडर और कैंसर के बीच का संबंध 100 प्रतिशत स्पष्ट नहीं है, लेकिन इससे दूर रहना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

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