खरगे ने PM मोदी से पूछा: क्या कभी खुद चाय बनाकर लोगों के बीच बांटी? मनरेगा वाली मजदूरी करने की नसीहत भी दी

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा योजना को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करना महात्मा गांधी का नाम और ग्राम स्वराज की सोच मिटाने की कोशिश है। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी के ‘चायवाले’ दावे पर भी जमकर निशाना साधा। जो कि खूब सुर्खियों में भी है। खरगे ने सरकार पर गरीब लोगों का हक छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चार दिन आप भी मजदूरी कीजिए। मनरेगा का काम कीजिए तब पता चलेगा।

बता दें कि खरगे ने यह बातें कांग्रेस द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा मजदूर सम्मेलन में बोलते हुए कही। इस सम्मेलन में देशभर से आए मजदूरों ने हिस्सा लिया। वे अपने-अपने काम के स्थान से एक मुट्ठी मिट्टी लेकर आए। इस मिट्टी को पौधों में डाला गया, जो मजदूरों के संघर्ष और उनके हक का प्रतीकात्मक संदेश था। इस मौके पर खरगे के साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे। इसके साथ ही खरगे ने आगे कहा कि सरकार ने मनरेगा को खत्म कर गरीबों और मजदूरों के हक पर हमला किया है। हम बजट सत्र में इस फैसले के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे।

 

कभी खुद चाय बनाई है- खरगे
खरगे ने कहा कि लोगों के वोट लेने के लिए ‘मैं चाय वाला हूं’ कहते रहे। कभी चाय बनाई या केतली लेकर हर आदमी को दिया क्या? केवल भाषण के सहारे लोगों के वोट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। सब इनका नाटक है। गरीबों को दबाना इनकी आदत है।

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बजट सत्र में कांग्रेस उठाएगी ये मुद्दा- खरगे
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को सरकार पर बड़ा आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा कानून को खत्म करना महात्मा गांधी का नाम लोगों की यादों से हटाने की कोशिश है। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे ग्राम स्वराज की सोच भी कमजोर होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट रहें और सरकार को नया कानून लागू न करने दें। खरगे ने साफ कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद के बजट सत्र में जोर-शोर से उठाएगी।

‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की शुरुआत
गौरतलब है कि कांग्रेस ने 10 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नाम से 45 दिन का देशव्यापी आंदोलन शुरू किया है। यह आंदोलन यूपीए सरकार के समय बने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को बचाने के लिए चलाया जा रहा है। इस संग्राम के माध्यम से कांग्रेस की सरकार से मांग है कि मनरेगा की जगह लाया गाया विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून को वापस लिया जाए।

इसके साथ ही मनरेगा को उसके मूल अधिकार आधारित स्वरूप में बहाल करे। ग्रामीणों के काम के अधिकार को बनाए रखे। पंचायतों की ताकत और अधिकार को फिर से मजबूत करे। कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवनरेखा है, जिसे खत्म नहीं होने दिया जाएगा।

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