यूपी विधानसभा की कार्यवाही जारी है। सदन की शुरुआत परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, स्कूल मर्जर और शिक्षकों की भर्ती के सवालों के साथ हुई।
विधान परिषद में कोडीन पर चर्चा
केशव बोले-एक भी आरोपी बचेगा नहीं। अखिलेश यादव का संतुलन बिगड़ा, बिहार जीत के लड्डू उन्हें भिजवाऊंगा। वहीं, शाहनवाज ने कहा, हम फोटो-फोटो खेल रहे, कोडीन मामले में पकड़े गए लोगों को मिली जमानत।
लोक सेवा आयोग की भर्तियों में अनियमितता
विधायक संदीप ने लोक सेवा आयोग की भर्तियों में अनियमितता की बात कही। आज नौजवानों को नाट फार सूटेबल बताकर किनारे कर दिया जाता है। आरक्षण न देना पड़े इसलिए सरकारी नौकरियां खत्म कर दी गईं। आरक्षण न देने पड़े निजीकरण किया जा रहा है।
वोट काटने का दबाव बनाते हैं बीएलओ
सपा विधायक पारस ने कहा कि यदि कोई बाहर रहता है तो बीएलओ उसका वोट काटने का दबाव बनाते हैं। कोई बाहर काम कर रहा है तो उसके घरवाले उसका फार्म भर सकते हैं लेकिन बीएलओ उसका भी नाम काटने का दबाव बना रहे हैं। यही नहीं पहले वोटर बनने पर कोई भी व्यक्ति आसानी से फार्म 6 भर सकता था। लेकिन, अब एफिडेविट मांगा जाता है। इसे बनवाने में करीब 600 रुपये खर्च होते हैं।
सदन में बीएलओ की मौत का मुद्दा उठा
विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने यूपी में 10 बीएलओ की हुई मौतों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि एसआईआर की जल्दबाजी क्यों थी? बिना किसी ट्रेनिंग के शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई। इससे अफसरों का उन पर अतिरिक्त दबाव था। इससे उनकी मौत हुई। उन्होंने मुरादाबाद के शिक्षक सर्वेश के सुसाइड की मौत का जिक्र किया।
फतेहपुर में 27 वर्षीय लेखपाल ने शादी के एक दिन पहले सुसाइड कर लिया। एक महिला शिक्षक की काम के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई। ये तो महज वो घटनाएं थी जो सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आ गईं। बाकी न जाने कितनी घटनाएं हुई होंगी। इसके बाद भी सरकार ने इसकी जवाबदेही नहीं ली। प्रशासनिक लापरवाही के कारण शिक्षकों की जान गई।
इस जल्दबाजी में सबसे ज्यादा गरीब, दलितों के नाम कटे। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार उनके परिजनों को नौकरी देगी? साथ ही परिवार को 50 लाख के आर्थिक मदद की मांग रखी।








