केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 20 अगस्त को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरलम, तमिलनाडु, तेलंगाना राज्य और पुडुचेरी, अंडमान निकोबार द्वीप समूह एवं लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र शामिल हैं। सभी राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सहयोग से पिछले लगभग बारह वर्षों में (जून 2014 से अब तक) विभिन्न क्षेत्रीय परिषदों और इनकी स्थायी समितियों की कुल 69 बैठकें आयोजित हुईं है।
क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति का भी गठन किया है। राज्यों द्वारा प्रस्तावित मुद्दों को पहले क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के समक्ष चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें विचारो होने के बाद शेष बचे मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सहकारी संघवाद के आधार पर देश के सामने ‘टीम भारत’ की कल्पना रखी है और क्षेत्रीय परिषदें इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
क्षेत्रीय परिषदें मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र बनाते हैं की भावना से काम करती हैं। परिषदें दो या अधिक राज्यों अथवा केंद्र और राज्यों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर, संवाद और चर्चा के लिए एक व्यवस्थित तंत्र, तथा इसके जरिये आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए मंच प्रदान करती हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषद की बैठकें संवाद से समाधान का सशक्त मंच बनी हैं।
क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका सलाहकारी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये परिषदें विभिन्न क्षेत्रों में आपसी समझ और सहयोग के स्वस्थ बंधन को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कारक साबित हुई हैं। क्षेत्रीय परिषदें, केंद्र और सदस्य राज्यों/ संघ राज्यक्षेत्रों के बीच, सदस्य राज्यों/ संघ राज्यक्षेत्रों के मध्य, तथा क्षेत्र के मुद्दों और विवादों को हल करने और उन पर प्रगति लाने के लिए एक श्रेष्ठ मंच प्रदान करती है।
ये परिषदें, राष्ट्रीय महत्व के व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा करती हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ दुष्कर्म के मामलों की त्वरित जांच और इनके शीघ्र निपटान के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों का कार्यान्वयन और शिक्षा से संबंधित मुद्दे आदि शामिल हैं। साथ ही क्षेत्रीय स्तर के सामान्य हित के विभिन्न मुद्दे जैसे आन्ध्र प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम से सम्बंधित मुद्दे, जल बंटबारे से सम्बंधित महत्वपूर्ण परियोजनाओं के मुद्दे, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, नागरिक उड्डयन से सम्बंधित मुद्दे, आदि शामिल हैं।
क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति का भी गठन किया है। राज्यों द्वारा प्रस्तावित मुद्दों को पहले क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के समक्ष चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें विचारो होने के बाद शेष बचे मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सहकारी संघवाद के आधार पर देश के सामने ‘टीम भारत’ की कल्पना रखी है और क्षेत्रीय परिषदें इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
क्षेत्रीय परिषदें मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र बनाते हैं की भावना से काम करती हैं। परिषदें दो या अधिक राज्यों अथवा केंद्र और राज्यों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर, संवाद और चर्चा के लिए एक व्यवस्थित तंत्र, तथा इसके जरिये आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए मंच प्रदान करती हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषद की बैठकें संवाद से समाधान का सशक्त मंच बनी हैं।
क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका सलाहकारी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये परिषदें विभिन्न क्षेत्रों में आपसी समझ और सहयोग के स्वस्थ बंधन को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कारक साबित हुई हैं। क्षेत्रीय परिषदें, केंद्र और सदस्य राज्यों/ संघ राज्यक्षेत्रों के बीच, सदस्य राज्यों/ संघ राज्यक्षेत्रों के मध्य, तथा क्षेत्र के मुद्दों और विवादों को हल करने और उन पर प्रगति लाने के लिए एक श्रेष्ठ मंच प्रदान करती है।
ये परिषदें, राष्ट्रीय महत्व के व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा करती हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ दुष्कर्म के मामलों की त्वरित जांच और इनके शीघ्र निपटान के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों का कार्यान्वयन और शिक्षा से संबंधित मुद्दे आदि शामिल हैं। साथ ही क्षेत्रीय स्तर के सामान्य हित के विभिन्न मुद्दे जैसे आन्ध्र प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम से सम्बंधित मुद्दे, जल बंटबारे से सम्बंधित महत्वपूर्ण परियोजनाओं के मुद्दे, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, नागरिक उड्डयन से सम्बंधित मुद्दे, आदि शामिल हैं।





