Himachal: नए साल में भरेंगे 2,231 पद, बद्दी में नया शहर, घुमारवीं में बनेगी डिजिटल यूनिवर्सिटी

हिमाचल प्रदेश सरकार ने युवाओं के लिए नौकरियों का पिटारा खोला है। मंगलवार को राज्य सचिवालय में इस साल की मंत्रिमंडल की आखिरी बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, जलशक्ति समेत विभिन्न विभागों में 2,231 पद भरने का निर्णय लिया गया। अकेले शिक्षा विभाग में 1,400 पद भरे जाएंगे, जबकि स्वास्थ्य समेत अन्य विभागों में 831 पदों पर भर्ती होगी।

हिमाचल और चंडीगढ़ की सीमा पर बद्दी के शीतलपुर में विश्वस्तरीय टाउनशिप बनाई जाएगी। बिलासपुर के घुमारवीं में सार्वजनिक निजी भागीदारी के आधार पर मल्टी डिसिप्लिनरी इंस्टीट्यूट ऑफ इनोवेशन, स्किल, टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (डिजिटल यूनिवर्सिटी) स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। इसके लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त करने का भी फैसला लिया गया।

 

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सीबीएसई स्कूलों में गणित और अंग्रेजी के शिक्षकों के 400-400 पद सृजित करने का फैसला लिया गया। सौ स्कूलों में एक-एक स्पेशल एजुकेटर व योगा शिक्षक लगेंगे। तीन सौ मल्टी टास्क वर्कर और 100 चौकीदार रखने का भी फैसला लिया गया।

शिक्षा विभाग में अनुकंपा के आधार पर 28 आश्रितों को रोजगार देने को मंजूरी दी। प्रदेश के 100 सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया गया। सीबीएसई के मानक पूरा करने के लिए इन स्कूलों के लिए 100 करोड़ भी मंजूर किए गए। सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों का अलग कैडर बनाने के लिए परीक्षा के माध्यम से चयन करने को मंजूरी दी। इन स्कूलों के लिए भर्ती, प्रशिक्षण और मूल्यांकन मानदंडों के साथ एक समर्पित सब कैडर बनाया जाएगा।

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सरकार ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 53 और विभिन्न श्रेणियों के 121 पद भरने का निर्णय लिया है। इनमें टीचिंग व नॉन-टीचिंग और पैरा मेडिकल स्टाफ के पद हैं। असिस्टेंट स्टाफ नर्सिंग पॉलिसी के तहत राज्य चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से असिस्टेंट स्टाफ नर्स के 600 पद सृजित करने को मंजूरी दी। इस बैठक में डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन और मास्टर ऑफ चिरुरगिया की योग्यता हासिल करने वाले फैकल्टी डॉक्टरों को बेसिक पे का 20 फीसदी इंसेंटिव देने का भी निर्णय लिया। खंड विकास अधिकारी के 10 पदों को भरने की मंजूरी दी। जल शक्ति विभाग में जॉब ट्रेनी और जूनियर इंजीनियर सिविल के 40 रिक्त पद भरने की भी स्वीकृति दी गई।

3400 बीघा जमीनटाउनशिप के लिए हिमुडा के नाम करने को मंजूरी
बद्दी के शीतलपुर में चंडीगढ़ सीमा पर टाउनशिप विकसित होगी। बैठक में टाउनशिप के लिए 3400 बीघा जमीन हिमुडा के नाम करने को मंजूरी दे दी गई। इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार वन भूमि और निजी भूमि का भी अधिग्रहण करेगी। मंत्रिमंडल की बैठक में इस मामले को लेकर गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति ने अपनी रिपोर्ट रखी। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को बताया कि शीतलपुर टाउनशिप में विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।

70% से अधिक दिव्यांगता वालों के बच्चे सुखाश्रय में 
राज्य सरकार ने सुखाश्रय योजना में भी संशोधन किया गया। धर्मशाला के टोंग-लेन स्कूल में नामांकित बच्चों और ऐसे बच्चे जिनके दोनों या एक जीवित माता-पिता की दिव्यांगता 70 प्रतिशत या उससे अधिक है, उन्हें भी मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना में शामिल किया जाएगा। जिन बच्चों के माता-पिता में से एक की मृत्यु हो गई है और दूसरे ने बच्चे का परित्याग कर दिया है। उन्हें भी योजना में शामिल करने का फैसला लिया गया। सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है।

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पिछड़ा वर्ग आयोग का मुख्यालय शिमला से धर्मशाला होगा शिफ्ट 
मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के मुख्यालय को शिमला से स्थानांतरित कर जिला कांगड़ा के धर्मशाला में स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इससे पहले एचपीटीडीसी के मुख्यालय को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट किया जा चुका है। सूचना आयोग, रेरा, पुलिस विभाग के सशस्त्र विंग और वन्य प्राणी विंग को भी कांगड़ा शिफ्ट करने का फैसला लिया जा चुका है।

वन भूमि और घास के मैदान पशुओं के लिए खोले जाएंगे 
मंत्रिमंडल ने चरवाहों और उनके पशुधन की सुचारु आवाजाही के लिए नया कानून बनाने का निर्णय लिया। इसे बजट सत्र में पारित करने का प्रस्ताव करने की तैयारी है। इसके तहत वन भूमि और घास के मैदानों को चरने वाले पशुओं के लिए खोलने का प्रावधान होगा। इससे प्रदेश के चरवाहों को बड़ी राहत मिलेगी।

इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखना, स्वदेशी नस्लों का संरक्षण करना, बाजार संबंधों और मूल्य संवर्धन को मजबूत करना बताया गया। वहीं, मंत्रिमंडल ने चीड़ के सूखे पेड़ों के कटान के लिए कानून में संशोधन करने का फैसला लिया है। कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश भूमि संरक्षण अधिनियम 1978 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत प्राकृतिक आपदाओं, बीमारी, कीट प्रकोप आदि के कारण सूखे चीड़ के पेड़ों का सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद कटान किया जा सकेगा।

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