हरीश राणा- हरीश को दर्द और मानसिक तकलीफ से राहत देने के लिए किया जा रहा ये काम, जारी हुआ हेल्थ अपडेट

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती गाजियाबाद के हरीश राणा की एक हफ्ते से निगरानी जारी है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें दर्द और मानसिक तकलीफ से राहत देने के लिए दवाएं दी जा रही है। 

डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल उन्हें कुछ दिन और अस्पताल में निगरानी में रखा जा सकता है। वह पिछले एक सप्ताह से बिना खाना और पानी के जीवित हैं। छह दिनों से चल रही इस प्रक्रिया के दौरान हरीश के माता-पिता अभी भी किसी चमत्कार का इंतजार कर रहे है। 

 

उनकी मां अस्पताल के गलियारे में बैठकर हाथ में हनुमान चालीसा लिए चमत्कार का इंतजार कर रही हैं। उनका कहना है कि मेरा बेटा सांस ले रहा है, उसकी धड़कन चल रही है, वह मुझे छोड़कर जा रहा है।

 

पिता की आंखों के आंसू सूख चुके हैं और वह भारी मन से बेटे की सम्मानजनक मौत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डॉक्टर से बोल रहे हैं कि आखिरी पल में मेरे बेटे को दर्द नहीं होना चाहिए।

 

इस बीच, अस्पताल की मेडिकल टीम हरीश राणा के माता-पिता की काउंसलिंग भी कर रही है, ताकि वे इस कठिन समय में मानसिक रूप से मजबूत रह सकें। जानकारी के अनुसार हरीश की हालत फिलहाल स्थिर है, सूत्र बताते है कि वह ठीक है।

 

हालांकि, एम्स ने इस पूरे मामले में कोई भी आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की है। एम्स से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ही काम कर रहे है।
15 दिन से एक महीना तक लग सकता है
एम्स के पूर्व निदेशक और सीताराम भारतीय इंस्टीट्यूट के कंसलटेंट डॉ. एमसी मिश्रा ने बताया कि ऐसे मामलों में हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जाता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन कर कोर्ट को रिपोर्ट देते हैं और उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होती है।
हरीश राणा के मामले में यह कहना मुश्किल है कि उनकी सांसें कब तक चलेंगी। अगर निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो न्यूट्रिशन बंद करने के बाद भी 15 दिन, एक महीना या उससे ज्यादा समय लग सकता है।
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