हल्द्वानी के टीपीनगर चौराहे के पास डंपर की चपेट में आकर हुई अनिल सिंह रौतेला की मौत सामान्य हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। शहर के अंदर तेज गति से दौड़ने वाले भारी वाहनों पर न पुलिस कार्रवाई करती है और न ही उसके पास इनके लिए कोई ठोस योजना है।
पांच जनवरी की शाम पनचक्की से दो किलोमीटर नीचे जगदंबा बैंक्वेट हॉल के पास एक कैप्सूल वाहन ने नो-एंट्री में चलते हुए 13 साल के अमित मौर्य को मौत की नींद सुला दिया था। उस समय तक पुलिस अधिकारी व प्रशासनिक अफसर भी खामोश रहे। जब 22 फरवरी को फिर नो-एंट्री में घुसकर कैंटर ने 65 साल के सुरेश चंद्र पांडेय को रौंदा तो जिम्मेदारों की नींद खुली। उस समय पुलिस अधिकारियों ने जल्द से जल्द नो-एंट्री के मानक, रूट और बेहतर यातायात संचालन के दावे किए जबकि प्रशासन ने मजिस्ट्रेटी जांच के बाद नए सिरे से यातायात गाइडलाइन की बात कही। दोनों दावे अब तक धरातल पर नहीं उतर पाए हैं।
मंगलवार की रात जब अनिल सिंह रौतेला को डंपर ने टक्कर मारा तो उसकी स्पीड ज्यादा थी। और वह देवलचौड़ से छड़ायल मार्ग की ओर भाग गया। इस रूट पर भारी वाहन बेधड़क होकर आबादी के बीच दौड़ रहे हैं। इससे राहगीर दहशत में है।
नो-एंट्री में 18 टायरा ट्रक फंसा, लगा लंबा जाम
बुधवार शाम छह बजे के करीब नो-एंट्री मार्ग देवलचौड़-छड़ायल पर 18 टायरा ट्रक पहुंचा। बड़ा होने से वह मोड़ पर फंस गया। नतीजतन यहां लंबा जाम लग गया। 10 से 15 मिनट के बाद ट्रक किसी तरह मुख्य मार्ग पर आया और जाम खुला। ट्रक चला लेकिन अपने पीछे सिस्टम की सुस्ती और उनकी लापरवाही पर बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया।
नो एंट्री के टाइमिंग में वाहन गुजरना बड़ी लापरवाही है। नो एंट्री के 12 प्वाइंट का चयन किया गया है। इसे प्रशासन के साथ मिलकर अंतिम रूप दिया जाएगा। ट्रैफिक का बेहतर संचालन हो इसके लिए चौराहों पर तैनात कर्मियों की माॅनिटरिंग भी की जाएगी। हादसे की घटना को अंजाम देने वाला वाहन पुलिस के कब्जे में है। चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे पकड़ा जाएगा। – मनोज कुमार कत्याल, एसपी सिटी







