भारतीय उत्पादों पर बुधवार से 50 फीसदी उच्च अमेरिकी टैरिफ लागू गया है। इससे 48.2 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर असर पड़ेगा। ट्रंप टैरिफ की वजह से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजारों में काफी महंगे हो जाएंगे, जिससे घरेलू निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के प्रतिस्पर्धियों की स्थिति कम टैरिफ के कारण अमेरिकी बाजार में बेहतर होगी। इस चुनौती से निपटने के लिए मोदी सरकार को बड़े स्तर पर प्रयास करने होंगे, अन्यथा न सिर्फ देश की जीडीपी पर असर पड़ेगा, बल्कि भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने का लक्ष्य भी प्रभावित होगा।
टैरिफ से कई सेक्टर होंगे प्रभावित: बड़े प्रयास की दरकार
- भारत 127 देशों को करीब 60 लाख टन बासमती चावल निर्यात करता है। इसमें से करीब 2.70 लाख टन यानी चार फीसदी बासमती चावल अमेरिका जाता है। अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ ने बासमती चावल निर्यातकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन बड़े नुकसान की आशंका नहीं है।
- निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका को निर्यात होने वाले 2.70 लाख टन चावल को अन्य देशों में खपाना बड़ी बात नहीं है। इसके लिए नए बाजार को तलाश कर उसकी भरपाई आसानी से की जा सकती है।
- ऑल इडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान से ही बासमती चावल खरीदता है। लेकिन, पाकिस्तान अमेरिकी जरूरतें पूरी करने में सक्षम नहीं है, क्योंकि इस्लामाबाद के कुल करीब 9 लाख टन चावल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 50 से 60 हजार टन है।
- अमेरिकी आयात (ऊर्जा, रक्षा और कृषि सामान) बढ़ाने की कोशिश, ताकि व्यापार घाटा कम हो और कूटनीतिक रास्ता खुले।
- प्रभावित निर्यातकों के लिए प्रोत्साहन। नए एफटीए के जरिये बाजार विविधीकरण।
- भारत अमेरिकी कृषि, व्हिस्की, मेडिकल डिवाइस और ऊर्जा पर जवाबी टैरिफ लगाए। लेकिन, अमेरिका का भारत को निर्यात सिर्फ 45 अरब डॉलर है। इनकी महंगाई से कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
- भारत टैरिफ को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चुनौती दे सकता है, लेकिन वहां कुछ होना मुश्किल है।
नए टैरिफ सिस्टम से जुड़ी बड़ी बातें
- अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के ड्राफ्ट नोटिस के मुताबिक 27 अगस्त 2025 को रात 12.01 बजे से नया टैरिफ सिस्टम लागू हो जाएगा. अब भारत से आयात होने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगेगा.
- भारतीय निर्यातक अमेरिका के 50% टैरिफ लागू करने के फैसले के बाद, ऑर्डर में गिरावट की आशंका से जूझ रहे हैं. हालांकि, एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ऐसे निर्यातकों को आर्थिक सहायता मिल सकती है. अब भारतीय निर्यातक चीन, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व जैसे बाजारों में संभावना तलाश रहे हैं.
- प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार (25 अगस्त) को अहमदाबाद में अमेरिकी टैरिफ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत दबाव का सामना करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि किसानों, पशुपालकों और लघु उद्योगों का हित उनकी प्राथमिकता है.
- पीएम मोदी ने मंगलवार (26 अगस्त) को गुजरात में स्वदेशी पर जोर दिया और कहा, “स्वदेशी की मेरी परिभाषा सरल है. मुझे इस बात की कोई चिंता नहीं है कि यह किसका पैसा है, चाहे वह डॉलर हो या पाउंड, या यह कहाँ से आता है. अहम यह है कि मेहनत भारतीय होनी चाहिए.”
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भारत पर अमेरिका के टैरिफ कई महीनों तक चली पांच दौर की व्यापार वार्ताओं के बाद लागू हो रहे हैं, जिनमें दोनों पक्ष ट्रेड डील करने में सफल नहीं रहे.
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एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के मुताबिक, टैरिफ में बढ़ोतरी का आर्थिक प्रभाव भारत के घरेलू बाजार के बड़े आकार से कम हो जाएगा.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि रसायनों, ऑटोमोबाइल और खाद्य एवं पेय पदार्थों के निर्यात को सबसे कठिन समायोजन का सामना करना पड़ेगा.
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अमेरिका भारत का सबसे बड़ी कपड़ा निर्यात जगह है. चीन और वियतनाम के बाद भारत, अमेरिका को तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है, जिसकी हिस्सेदारी 9 प्रतिशत है.
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पिछले पांच सालों में, भारत ने चीन की कीमत पर अमेरिका में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो 6 प्रतिशत से बढ़कर 9 प्रतिशत हो गई है, जबकि चीन की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत से घटकर 25 प्रतिशत रह गई है.
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भारत का घरेलू बाजार काफी बड़ा है, जो बाहरी मांग पर निर्भरता को कम करता है. यह देश को अमेरिकी टैरिफ से बचाए रखने में मददगार साबित हो सकता है.








