पूर्व विधायक प्रजापति का कथावाचकों पर विवादित बयान, बोले- जूतों की माला पहनाकर निर्वस्त्र घुमाया जाए

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ध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय, आरक्षण और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा सामाजिक-राजनीतिक टकराव सामने आ गया है। रविवार को राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में ओबीसी-एससी-एसटी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर महासम्मेलन और प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह आयोजन अपाक्स (APACS) के बैनर तले हुआ, जिसमें प्रदेशभर से कर्मचारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। महासम्मेलन के दौरान छतरपुर जिले की चंदला विधानसभा से पूर्व विधायक आरडी प्रजापति के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कुछ कथावाचकों पर महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने मंच से कुछ कथावाचकों के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी भाषा किसी भी धर्म, परंपरा या शास्त्र का हिस्सा नहीं हो सकती। प्रजापति ने कहा कि महिलाओं की गरिमा पर सवाल उठाना पूरे समाज को शर्मसार करता है। उन्होंने कथावाचकों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी की। प्रजापति ने कहा कि देश के पांच बाबा हैं, जो करोड़ों की भीड़ में बहन-बेटियां को गाली देते हैं। ऐसे कथावाचक व्यासपीठ से महिलाओं को लेकर विवादित बातें कह चुके हैं। मैं चाहता हूं कि हमको फांसी दी जाए, संतोष वर्मा को आईएएस से हटा दिया जाए, लेकिन पहले उनको (कथावाचकों को) जूतों की माला पहनाकर निर्वस्त्र घुमाया जाए, जो व्यास पीठ से ऐसा बोलते हैं।

 

भाजपा से रहे 2013 में विधायक 
आरडी प्रजापति वर्ष 2013 में भाजपा के टिकट पर चंदला विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। 2018 में भाजपा ने उनका टिकट काटकर उनके बेटे राजेश प्रजापति को उम्मीदवार बनाया, जो 2018 से 2023 तक विधायक रहे। इसके बाद आरडी प्रजापति समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने वर्ष 2024 में सपा के टिकट पर टीकमगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

संतोष वर्मा प्रकरण से बदले सामाजिक समीकरण
गौरतलब है कि IAS संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज की एक बच्ची को लेकर दिए गए बयान के बाद सवर्ण समाज के संगठनों ने कड़ा विरोध किया था। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई। अब इस पूरे मामले में तस्वीर बदलती नजर आ रही है। सवर्ण संगठनों के विरोध के उलट अब एससी-एसटी-ओबीसी संगठनों ने संतोष वर्मा के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। महासम्मेलन का मुख्य मुद्दा IAS अधिकारी संतोष वर्मा के समर्थन का रहा। आंदोलनकारियों ने संतोष वर्मा पर की गई कार्रवाई को तुरंत वापस लेने की मांग की। संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि संतोष वर्मा पर कार्रवाई दबाव में और एकतरफा तरीके से की गई है। उनका कहना है कि यह दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग की आवाज दबाने का प्रयास है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।

आरक्षण और अधिकारों को लेकर सरकार पर आरोप
महासम्मेलन को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि प्रदेश में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक नियुक्तियों में लगातार उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। हजारों पद वर्षों से खाली हैं, पदोन्नति में आरक्षण लागू नहीं हो पा रहा है और संवैधानिक अधिकार केवल कागजों तक सीमित हैं। नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन आरक्षण से आगे बढ़कर सामाजिक न्याय और प्रशासनिक निष्पक्षता की लड़ाई है।

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संयुक्त संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगें 
– ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण
– सभी रिक्त और बैकलॉग पदों पर शीघ्र भर्ती
– पदोन्नति में ओबीसी वर्ग को आरक्षण
– निजी और संविदा क्षेत्र में आरक्षण लागू करना
– पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
– संवैधानिक संस्थाओं में जनसंख्या अनुपात में प्रतिनिधित्व
– IAS संतोष वर्मा पर की गई कार्रवाई को तत्काल वापस लेना


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