हरियाली तीज- वृंदावन में उमड़ा आस्था का सैलाब, स्वर्ण-रजत झूले पर विराजे बांकेबिहारी

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रियाली तीज के पावन अवसर पर शनिवार को वृंदावन के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज अपने विशेष रत्नजड़ित स्वर्ण-रजत हिंडोले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए।  साल में केवल एक बार होने वाले इस विशेष झूला दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे।

मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही आस्था का सैलाब उमड़ा रहा। दर्शनार्थियों में बुजुर्ग श्रद्धालुओं की संख्या खास तौर पर अधिक नजर आई, वहीं युवाओं और जेनजी में भी ठाकुरजी के दर्शन को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया। हरियाली तीज पर ठाकुरजी दिल्ली से मंगाई गई विशेष हरे रंग की बेशकीमती जड़ाऊ पोशाक धारण की। रत्नजड़ित स्वर्णाभूषणों से उनका विशेष श्रृंगार किया गया। झूला विहार के बाद ठाकुरजी के विश्राम के लिए सुखसेज सजाई गई।

80वीं बार स्वर्ण-रजत हिंडोले में विराजे ठाकुरजी
इस बार ठाकुर बांकेबिहारीजी 80वीं बार विशेष स्वर्ण-रजत हिंडोले में विराजमान हुए। करीब 79 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक हिंडोले का निर्माण वर्ष 1942 से 1947 के बीच करीब पांच वर्षों में बनारस के कारीगरों ने किया था। वर्ष 1947 में पहली बार हरियाली तीज पर ठाकुरजी ने इस हिंडोले पर झूला विहार किया था। करीब पांच टन वजनी यह हिंडोला करीब 180 हिस्सों में तैयार किया गया है। इसमें नाचते हुए मयूर, घुमावदार सीढ़ियां, आकर्षक खंभे और ललिता, विशाखा, चित्रलेखा व रंगदेवी सखियों की आदमकद आकृतियां बनी हैं। बेल-बूटों की बारीक नक्काशी इसकी खूबसूरती बढ़ाती है। हिंडोले में करीब 10 हजार तोले सोना और एक लाख तोले चांदी के इस्तेमाल किया गया।

25 साल बाद डेढ़ करोड़ रुपये से हुआ नवीनीकरण
ऐतिहासिक हिंडोले का करीब 25 वर्ष बाद नवीनीकरण कराया गया है। जयपुर के 28 कारीगरों ने 22 दिनों तक विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच इसकी सफाई, मरम्मत, सोने के जड़ाव और पॉलिश का काम पूरा किया। इस दौरान करीब एक किलो सोने का इस्तेमाल किया गया। पूरे नवीनीकरण पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किया गया। हिंडोले की मरम्मत का काम लोहे की सींखचों से सुरक्षित कक्ष में सीसीटीवी कैमरों और पुलिस की निगरानी में कराया गया। नवीनीकरण के बाद हिंडोले को मंदिर पहुंचा दिया गया, जहां हरियाली तीज पर इसके सभी हिस्सों को जोड़कर विशाल स्वरूप में ठाकुरजी को विराजमान कराया गया ।
14 घंटे दर्शन, सुबह सात बजे खुले पट
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए श्रीबांकेबिहारी मंदिर की हाईपावर्ड कमेटी ने दर्शन का समय बढ़ाया है। हरियाली तीज पर मंदिर में सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक और शाम 4:15 बजे से रात 11 बजे तक दर्शन होंगे। यानी श्रद्धालुओं को करीब 14 घंटे ठाकुरजी के दर्शन का अवसर मिलेगा। सामान्य दिनों में सुबह करीब पौने आठ बजे से दोपहर 12:30 बजे और शाम पांच बजे से रात करीब साढ़े नौ बजे तक दर्शन होते हैं। कमेटी ने सेवायतों से निर्धारित समय के अनुसार ही मंदिर के पट खोलने और बंद करने का अनुरोध किया है, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित किया जा सके।

10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
इस बार हरियाली तीज के साथ स्वतंत्रता दिवस और शनिवार का अवकाश भी है। ऐसे में पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक श्रद्धालुओं के वृंदावन पहुंचने का अनुमान है। पिछले साल हरियाली तीज पर करीब छह लाख श्रद्धालुओं ने ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन किए थे। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने वृंदावन को चार सुपर जोन और 18 सेक्टर में बांटा है। करीब 70 स्थानों पर बैरियर लगाए गए हैं। नगर के प्रमुख तिराहों और चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों और पीए सिस्टम से निगरानी की जा रही है। भीड़ प्रबंधन के लिए मंदिर मार्ग पर 14 होल्डिंग एरिया भी बनाए गए हैं।

बाहरी वाहनों का प्रवेश बंद, मंदिर मार्ग नो व्हीकल जोन
यातायात व्यवस्था के तहत 14 अगस्त की रात से 15 अगस्त की रात तक बाहरी वाहनों का वृंदावन में प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया है। श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए स्थायी और अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की गई है। पार्किंग से मंदिर के नजदीक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा और गोल्फ कार्ट की सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकेगा। श्रीबांकेबिहारी मंदिर मार्ग को नो व्हीकल जोन रखा गया है। मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए वन-वे व्यवस्था लागू की गई है। जुगलघाट की ओर से आने वाले श्रद्धालु गेट नंबर दो से प्रवेश कर गेट नंबर एक से बाहर निकलेंगे। वहीं विद्यापीठ चौराहे की ओर से आने वाले श्रद्धालु गेट नंबर तीन से प्रवेश कर गेट नंबर चार से बाहर निकलेंगे।

 बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात
सुरक्षा व्यवस्था के लिए चार एएसपी, 12 सीओ, 70 इंस्पेक्टर, 260 सब इंस्पेक्टर, 90 महिला सब इंस्पेक्टर, 1400 कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल और 150 महिला कांस्टेबल तैनात किए गए हैं। इसके अलावा तीन ट्रैफिक इंस्पेक्टर, 30 ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर, 120 ट्रैफिक हेड कांस्टेबल, 400 होमगार्ड, दो कंपनी पीएसी और दो प्लाटून फ्लड पीएसी की तैनाती की गई है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की एक-एक टीम भी व्यवस्था में लगाई गई है। होटल, गेस्टहाउस और आश्रम संचालकों को भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर के खुलने-बंद होने का समय, जूते-चप्पल रखने और वाहनों की पार्किंग से संबंधित निर्देशिका चस्पा करने के निर्देश दिए गए हैं।
झूला विहार के बाद सुखसेज पर विश्राम करेंगे बिहारीजी
हरियाली तीज की परंपरा में ठाकुरजी के झूला विहार के साथ सुखसेज का विशेष महत्व है। झूला विहार के बाद ठाकुरजी के विश्राम के लिए स्वर्ण-रजत निर्मित शयनशैया सजाई जाएगी। पास में रजत आइना और श्रृंगार सामग्री से सुसज्जित सुहाग पिटारी रखी जाएगी। प्रियाजी और प्रियतम के मनोरंजन के लिए चांदी की शतरंज भी सजाई जाएगी। हरियाली तीज पर ठाकुरजी को दोनों समय हरे रंग की विशेष जड़ाऊ पोशाक और रत्नजड़ित स्वर्णाभूषण धारण कराए जाते हैं। इस अवसर पर मावा, मलाई, मक्खन, सादा, मीठा घेवर और फीकी, मीठी व केसरिया फैनी का विशेष भोग अर्पित किया जाता है। वर्ष में एक बार होने वाले इस अद्भुत झूला दर्शन को लेकर वृंदावन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। बुजुर्गों से लेकर युवा पीढ़ी तक ठाकुरजी के दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़ी नजर आ रही है। आस्था, परंपरा और ऐतिहासिक स्वर्ण-रजत हिंडोले का यह अद्भुत संगम हरियाली तीज को वृंदावन के सबसे खास धार्मिक आयोजनों में शामिल करता है।

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