केंद्र सरकार में वित्त मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार डॉ. सुमंत्र पाल की एक सलाह, कर्मचारियों के बीच चर्चा का केंद्र बनी है। इस सलाह पर केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसयू) के कर्मचारी हैरान और परेशान हैं। दरअसल, आर्थिक सलाहकार की तरफ से 17 सितंबर को लोक उद्यम विभाग (डीपीई) को कहा गया है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में दीवाली और दूसरे त्योहारों पर गिफ्ट देने की प्रथा पर रोक लगाई जाए। गिफ्ट से सरकारी खर्च बढ़ता है। अर्थव्यवस्था में जनता के संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग हो, इसके लिए यह कदम उठाना जरुरी है।
बता दें कि डीपीई, वित्त मंत्रालय के अधीन एक नोडल विभाग है, जो केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से संबंधित नीतियों और दिशानिर्देशों को तैयार करता है, उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है। उनके कार्य-निष्पादन, स्वायत्तता व कार्मिक प्रबंधन पर नीतिगत दिशानिर्देश निर्धारित करता है। तीसरी लोकसभा (1962-67) की प्राक्कलन समिति की 52वीं रिपोर्ट में सार्वजनिक उद्यमों के प्रदर्शन का निरंतर मूल्यांकन करने के लिए एक केंद्रीकृत समन्वय इकाई की स्थापना की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया था। परिणामस्वरूप, भारत सरकार ने 1965 में सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो (बीपीई) की स्थापना की और इसे वित्त मंत्रालय के अधीन कर दिया।
सितंबर 1985 में केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के पुनर्गठन के बाद, बीपीई उद्योग मंत्रालय का एक हिस्सा बन गया। मई 1990 में इसमें और सुधार हुए, जिससे बीपीई को एक पूर्ण विभाग का दर्जा मिला जिसे लोक उद्यम विभाग (डीपीई) के नाम से जाना गया। डीपीई का मिशन, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता और सामाजिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए नीतियां तैयार करना, पारदर्शिता को बढ़ावा देना और जिम्मेदार शासन को बढ़ावा देना है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में उत्कृष्टता, स्थिरता और नवाचार को बढ़ावा देने में एक प्रेरक शक्ति बनना, जो राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।







