थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट को मंगलवार (4 अगस्त) को तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। दिल्ली पहुंचने के बाद फ्लाइट के पायलट का ‘साइकोएक्टिव सब्सटेंस’ (डोप) टेस्ट किया गया। सूत्रों के मुताबिक, इसमें कैप्टन के पॉजिटिव पाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, एअर इंडिया के प्रवक्ता ने अभी इस मामले की पुष्टि नहीं की है।
एअर इंडिया के प्रवक्ता ने मामले पर प्रतिक्रिया दी है। एयरलाइन ने पायलट के डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने की न तो पुष्टि की है और न ही इसे खारिज किया है। एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि तय नियमों के तहत फ्लाइट की लैंडिंग के बाद पायलटों का पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग टेस्ट कराया गया था। हालांकि, टेस्ट के नतीजे अभी तक एयरलाइन के साथ साझा नहीं किए गए हैं। ऐसे में एअर इंडिया फिलहाल किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है।
प्रवक्ता के मुताबिक, एअर इंडिया नागरिक उड्डयन नियमों के तहत क्रू मेंबर्स का नियमित ड्रग टेस्ट कराता है। ये टेस्ट किसी खास फ्लाइट या ऑपरेशनल घटना से अलग भी किए जाते हैं। एयरलाइन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करती रहेगी। दरअसल, उड़ान संख्या AI-2379 ने मंगलवार (4 अगस्त) सुबह 8:41 बजे फुकेट से 134 यात्रियों के साथ दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। करीब डेढ़ घंटे बाद दिल्ली पहुंचने से पहले क्रूज चरण में विमान तेज टर्बुलेंस की चपेट में आ गया। यात्रियों के मुताबिक, विमान करीब दो से तीन मिनट तक तेज झटकों के साथ डगमगाता रहा। झटके इतने तेज थे कि केबिन की सीलिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई।
DGCA कर रहा हर पहलू की जांच
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) इस मामले की हर एंगल से जांच कर रहा है। जांच में मुख्य तौर पर इन बिंदुओं पर फोकस है।
- टर्बुलेंस के दौरान पायलटों ने स्थिति को कितनी अच्छी तरह संभाला?
- घटना खराब मौसम के कारण हुई या इसके पीछे कोई और वजह थी?
- तेज झटकों से विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम पर कोई असर पड़ा या नहीं?
- विमान को दिल्ली लाने के बजाय वाराणसी या लखनऊ जैसे नजदीकी एयरपोर्ट पर डायवर्ट क्यों नहीं किया गया?
मौजूदा नियमों और प्रोटोकॉल के तहत जांच पूरी होने तक संबंधित क्रू मेंबर्स को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया जाता है। इसी नियम के तहत इस फ्लाइट के पायलटों को भी फिलहाल उड़ान भरने से रोक दिया गया है।








