भारत का वित्तीय सेवा क्षेत्र एक बड़े संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब बात केवल ‘डिजिटल पेमेंट’ की नहीं, बल्कि ‘इंटेलिजेंट ऑटोमेशन’ की है। इंडिया एआई इम्पैक्सट समिट के दौरान आयोजित भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई के एक महत्वपूर्ण सत्र में यह बात साफ हो गई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम की रीढ़ बन रहा है।
इस बदलाव का केंद्र केवल दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि उन बाजारों तक पहुंच बनाना है जो अब तक बैंकिंग सेवाओं से अछूते थे। सत्र में नीति निर्माताओं और उद्योग के दिग्गजों ने माना कि एआई वित्तीय समावेशन के नए दरवाजे खोल रहा है, लेकिन इसके साथ ही जोखिम प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो आधार सबसे बड़ा स्तंभ है। सत्र के दौरान, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के उप महानिदेशक विवेक चंद्र वर्मा ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए कहा, “आधार हर दिन नौ करोड़ प्रमाणीकरण करता है”। वर्मा ने बताया कि जब देश की लगभग 100% वयस्क आबादी आधार से जुड़ी हो और लेनदेन की मात्रा इतनी विशाल हो, तो फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट अनिवार्य हो जाता है।
उन्होंने कहा, “यूआईडीएआई में नामांकन, अपडेशन और प्रमाणीकरण प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए एआई और एडवांस्ड एनालिटिक्स पहले से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं”। भविष्य के एआई मॉडल इस टेक स्टैक को और अधिक मजबूत और ‘कस्टमर-सेंट्रिक’ बनाएंगे।
कॉरपोरेट का नजरिया- दक्षता और नए समाधान जरूरी
केपीएमजी के अतुल गुप्ता की ओर से संचालित इस सत्र में निजी क्षेत्र ने एआई के व्यावहारिक उपयोग पर जोर दिया। उद्योग के नेताओं ने बताया कि कैसे तकनीक पारंपरिक बाधाओं को तोड़ रही है। हीरो फिनकॉर्प के साजिन मंगलथु ने बताया कि कंपनियां परिचालन दक्षता बढ़ाने और जोखिम मूल्यांकन ढांचे को मजबूत करने के लिए एआई का लाभ उठा रही हैं।
इनसॉल्यूशन्स ग्लोबल की एमडी एडेलिया कैस्टेलिनो ने कहा कि केवाईसी और यूपीआई से जुड़ी तकनीकी प्रगति ने ऐसे समाधान विकसित करना संभव बना दिया है जो पहले व्यवहार्य नहीं थे। पॉलिसीबाजार के सीटीओ सौरभ तिवारी के अनुसार देश में तकनीकी विकास ने उनकी फर्म को ग्राहक-केंद्रित समाधानों को अपनाने और सेवाओं को बड़े पैमाने पर स्केल करने की अनुमति दी है। एआई का सबसे बड़ा प्रभाव ‘अंडरसर्व्ड मार्केट’ यानी उन ग्राहकों तक पहुंच बनाने में है जो पारंपरिक बैंकिंग से दूर थे।
टू बैलेंस के सीओओ सौम्यजीत घोष ने बताया कि एआई-सक्षम फीचर्स इन नए बाजारों तक पहुंचने के अवसर पैदा कर रहे हैं। हालांकि, इस विस्तार के साथ जोखिम भी हैं। मास्टरकार्ड के अभिषेक लाहिड़ी ने कहा कि एआई सेवा प्रदाताओं और उपयोगकर्ताओं दोनों के सामने आने वाले जोखिमों को संबोधित करने में मदद कर रहा है। चर्चा में ‘एआई एकाग्रता जोखिम’, आपूर्ति शृंखला की निर्भरता और विनियमन बनाम नवाचार के बीच संतुलन पर भी गंभीर मंथन हुआ।
भारत का फिनटेक सेक्टर अब परिपक्वता के अगले चरण में
16 फरवरी, 2026 को आयोजित इस सत्र के दौरान वक्ताओं ने माना कि भारत का फिनटेक सेक्टर अब परिपक्वता के अगले चरण में है। आधार जैसे विशाल डेटाबेस की सुरक्षा से लेकर अंतिम ग्राहक तक ऋण पहुंचाने तक, एआई अब एक विकल्प नहीं बल्कि जरूरत है। चुनौती अब केवल तकनीक अपनाने की नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और विनियमित एआई गवर्नेंस ढांचा तैयार करने की है।









