प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को वेदांता समूह के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान ईडी ने कई जगहों पर छापेमारी की। कारोबारी अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह पर ईडी ने फेमा उल्लंघन मामले में यह कार्रवाई की है। अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई जारी है। उन्होंने बताया कि ये तलाशी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन की जांच का हिस्सा हैं। मामले में अभी और जानकारी सामने आना बाकी है। कंपनी की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है।
फेमा के तहत कब होती है कार्रवाई?
ईडी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत तब कार्रवाई करता है जब उसे किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा विदेशी मुद्रा से जुड़े लेन-देन में उल्लंघन का संदेह होता है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से ऐसे मामलों में की जाती है जहां अवैध रूप से विदेश में धन हस्तांतरण, विदेश में अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करना, या विदेशी निवेश से संबंधित नियमों का पालन न करना शामिल होता है।
भारत की अग्रणी बहुराष्ट्रीय कंपनी है वेदांता समूह
वेदांता समूह भारत का एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन और खनन समूह है। इसकी स्थापना वर्ष 1976 में हुई थी और यह धातु, खनिज, ऊर्जा तथा तेल-गैस क्षेत्रों में कारोबार करता है। समूह का मुख्य व्यवसाय खनन और प्राकृतिक संसाधनों का उत्पादन है। वेदांता जस्ता, एल्युमीनियम, तांबा, लौह अयस्क, इस्पात, तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समूह की प्रमुख कंपनियों में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, केयर्न इंडिया और वेदांता एल्युमिनियम शामिल हैं। भारत के साथ-साथ अफ्रीका और अन्य देशों में भी इसका कारोबार फैला हुआ है। भारत में एल्युमीनियम और जस्ता उत्पादन के क्षेत्र में वेदांता अग्रणी कंपनियों में गिनी जाती है।







