डेमोक्रेजी’ के बूते छठवीं बार फिल्म स्टार, द्रमुक-अन्नाद्रमुक समेत 35 पार्टियों को शिकस्त

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मिलनाडु को छठवीं बार फिल्मी दुनिया से ताल्लुक रखने वाला सीएम मिलने जा रहा है। विजय की जीत डेमोक्रेजी यानी लोकतंत्र में दीवानगी की हदें पार कर देने की मिसाल है। फैन्स के वोट में बदल जाने का संयोग भी है और प्रयोग भी। पहला सवाल यह कि विजय की लार्जर दैन लाइफ जीत का अंदाजा राजनीति के धुरंधरों से लेकर तमाम चुनावी सर्वेक्षण क्यों नहीं लगा पाए? एक्सिस इंडिया को छोड़ दें, तो सभी ने डीएमके की जीत का अनुमान लगाया था। क्या हर वोट को फॉर्मूलों में गूंथने का दम भरने वाली कौम किसी अद्भुत-ऑफबीट जीत के लिए तैयार ही नहीं थी या फिर दो बड़ी पार्टियों की द्रविड़ राजनीति की आदत के सामने हम विजय के लिए जुटने वाली बेहिसाब भीड़ को फानी समझ रहे थे।

 

टीवीके ने अपने पहले चुनाव में राज्य फतह कर ये समझाया है कि एक बड़ा फिल्म स्टार एक बड़ा राजनेता बन सकता है। जो विजय को राजनीति के अनुभवों में कच्चा समझ रहे थे, उनके लिए यह एक केस स्टडी है। उनकी जीत एमजीआर से बड़ी जीत है, क्योंकि उन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं जीता, सिर्फ डीएमके और अन्नाद्रमुक को नहीं, बल्कि 35 और पार्टियों को एकसाथ हराया है।

बात डीएमके के गठबंधन की है, जिसमें इतनी सारी पार्टियों को बिना सोचे समझे किसी ऑनलाइन शॉपिंग कार्ट की तरह जोड़ लिया गया। जिसे वोटकटवा समझा जा रहा था, वह राजनीति का ब्लॉकबस्टर निकला। यह परिणाम सिर्फ विजय की बड़ी जीत के लिए नहीं बल्कि एमके स्टालिन की बड़ी हार के लिए भी जाने जाएंगे। आठवीं पास वीएस बाबू से ग्रेजुएट स्टालिन वह सीट हार गए जिसके वह 2011 से सरताज थे। स्टालिन तमिलनाडु के तीसरे ऐसे सीएम बन गए हैं, जो अपनी सीट नहीं बचा सके। इससे पहले जयललिता हार गईं थीं।

वैसे हारे सिर्फ सीएम नहीं, सरकार के ज्यादातर मंत्री हार गए। खुद को पीढ़ियों और परंपराओं के पहले दावेदार समझने वाले बड़े नाम भी सीट नहीं बचा पाए। एक और नई बात…तमिलनाडु में कई वर्षों बाद गठबंधन सरकार बनेगी। इससे पहले 2006 में कांग्रेस के बाहरी समर्थन से डीएमके ने सरकार बनाई थी।

आखिर विजय जीत कैसे गए, यह बोल-बोलकर चौंकने वालों को यह पता होना चाहिए कि दो साल पहले पार्टी बनाने के काफी पहले से वह सोशल वर्क कर रहे हैं। कई घरों के चूल्हों को इंधन, बेटियों की पढ़ाई और बहनों की शादी का खर्च उठा रहे थे। यही वजह है कि फिल्मों के मसीहा के वोट बैंक में सबसे बड़ी हिस्सेदारी युवाओं और महिलाओं की रही। तमिलनाडु की राजनीति ने यह साबित कर दिया है सियासत तर्क से नहीं चेहरों के बूते जीती जाती है।

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जनता के आगे नतमस्तक : स्टालिन
डीएमके अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी जनता के फैसले के आगे नतमस्तक है। उसे स्वीकार करती है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के रूप में अच्छा प्रदर्शन करने वाली उनकी पार्टी अब से मुख्य विपक्षी दल के रूप में भी अच्छा प्रदर्शन करेगी।


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