डॉक्टर बना दरिंदा: सरकारी अस्पताल के चिकित्सक ने नाबालिग से की हैवानियत, कई बार ओपीडी रूम में बुलाकर लूटी आबरू

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कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) जिला नागरिक अस्पताल में एक कंसल्टेंट चिकित्सक पर 29 मई को भर्ती हुई नाबालिग से दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। पीड़िता के पेट में दर्द व पेशाब में जलन होने पर उसे महिला वार्ड में दाखिल कराया गया था।

पीड़िता का उपचार आरोपी चिकित्सक ही कर रहा था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आराेपी ने ही उसे अस्पताल में दाखिल होने के लिए फोन करके बोला। इसके बाद अपने ओपीडी रूम में बुलाकर उससे कई बार दुष्कर्म किया। आरोप है कि एक बार उसे अपने कमरे में देर तक अंदर रखा और दुष्कर्म किया।

नाबालिग ने आरोप लगाया कि 30 मई की रात 8:30 पर उसने वार्ड नर्स को बताया कि उसे ब्लीडिंग हो रही है। नर्स तुरंत उसे इमरजेंसी वार्ड में चिकित्सक के पास लेकर पहुंची। इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. उपेंद्र को आपबीती बताने पर उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी।

 

पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज कर उसकी सुरक्षा में एक महिला पुलिसकर्मी को तैनात कर दिया। थाना के केयूके प्रभारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि परिजनों से शिकायत लेकर तहरीर दर्ज कर ली गई है। मजिस्ट्रेट नियुक्त करवा कर नाबालिग के बयान दर्ज करवाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। आरोपी चिकित्सक की तलाश में टीम दबिश दे रही है।

पहले भी दुष्कर्म के आरोप में जा चुका जेल
आरोपी चिकित्सक पर पहले भी दुष्कर्म का आरोप लग चुका है। आरोपी सीएमओ पद से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में एलएनजेपी अस्पताल में कंसल्टेंट फिजिशियन है। पहले भी एक महिला से दुष्कर्म के मामले में जेल जा चुका है।
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इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट करने पर पता चला
डॉ. उपेंद्र के अनुसार नाबालिग को 29 मई की दोपहर आरोपी चिकित्सक के अधीन भर्ती किया गया था। रात करीब 8:30 बजे नाबालिग को अधिक ब्लीडिंग की शिकायत के बाद इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट किया गया। यहां नाबालिग ने अपने साथ हुए यौन शोषण का खुलासा किया।

नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप वाले डॉक्टर पर महिला आयोग सख्त, स्वास्थ्य विभाग से मांगी रिपोर्ट
हरियाणा राज्य महिला आयोग ने कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल के एक डॉक्टर पर नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म और यौन शोषण के आरोपों के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को पत्र लिखकर मामले में तत्काल कार्रवाई करने और एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) भेजने को कहा है।
आयोग के अनुसार यह मामला मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर सामने आया है। आयोग ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल एक नाबालिग की सुरक्षा और सम्मान पर गंभीर हमला है, बल्कि एक डॉक्टर जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा विश्वास का दुरुपयोग भी है।

महिला आयोग ने स्वास्थ्य विभाग से आरोपी डॉक्टर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करने का आग्रह किया है। साथ ही विभागीय जांच शुरू कर आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाने को भी कहा गया है।

आयोग ने पीड़िता की सुरक्षा, काउंसलिंग और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा आरोपी डॉक्टर की सेवा समाप्त करने की संभावना पर भी नियमों के अनुसार विचार करने की सिफारिश की गई है।

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