बुढ़िया के बाल- बच्चों को न खाने दें बुढ़िया के बाल, हो सकते हैं कैंसर का शिकार, यहाँ की सरकार लगा चुकी बैन

Spread the love

च्चों की पसंदीदा कॉटन कैंडी यानी बुढ़िया के बाल में खतरनाक केमिकल युक्त रंग पाए गए हैं। ये स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक हैं। इनसे कैंसर तक हो सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लिए गए सैंपल की जांच में इसका खुलासा हुआ है। इसके अलावा लाल मिर्च पाउडर, चाऊमीन और समोसा-कचौरी के साथ खाई जाने वाली लाल चटनी भी असुरक्षित है। इनमें भी खतरनाक रंग पाए गए, जो कैंसरकारक हो सकते हैं।

 

 

सिंथेटिक रंग सेहत के लिए हानिकारक
खाद्य सुरक्षा विभाग ने महीने भर पहले यूपी के साहिबाबाद क्षेत्र से कॉटन कैंडी का सैंपल लिया था। इसे जांच के लिए लखनऊ भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट दो दिन पहले आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कैंडी में जिन रंगों का इस्तेमाल किया गया, वह मानव सेवन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। सहायक आयुक्त खाद्य प्रभारी आशुतोष राय ने बताया कि इसमें सिंथेटिक रंग का इस्तेमाल किया गया था, जो मानकों के अनुरूप नहीं था। यह सेहत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है। इन दिनों शादी-पार्टी में भी कॉटन कैंडी के स्टॉल लगाए जा रहे हैं। स्थानीय विक्रेता भी मानकों का पालन नहीं करते।

 

लाल मिर्च और चटनी में मिला हानिकारक रंग
उन्होंने बताया कि इसके अलावा वैशाली के चाप जंक्शन से लाल मिर्च पाउडर का सैंपल लिया गया था। इसमें प्रतिबंधित फूड कलर मिला, जिसमें सूडान-2 का इस्तेमाल होता है। इसे खाने से कैंसर तक हो सकता है। इसी क्षेत्र से लिए गए चाऊमीन के सैंपल में सिंथेटिक मेटेलिक यलो रंग पाया गया। इसके भी इस्तेमाल की अनुमति नहीं है।

और पढ़े  Indians Killed- ईरान-US जंग के बीच तीन भारतीय नाविकों की मौत, क्या US नेवी को पता थी राष्ट्रीयता?

अरहर और चने की दाल में मिले कीड़े
विजयनगर से लिए गए लाल चटनी के सैंपल में भी सिंथेटिक रंग पाया गया। इसका इस्तेमाल मानक से अधिक किया गया था। इसके अलावा अरहर व चने की दाल के सैंपल लिए गए थे, जिसमें कीड़े पाए गए हैं।

तमिलनाडु सरकार ने लगाई रोक 
सिंथेटिक रंग व सूडान-2 जैसे केमिकल शरीर में धीरे-धीरे एकत्र होते हैं और कुछ वर्षों बाद कैंसर का कारक बनते हैं। अधिक मात्रा में इस्तेमाल किडनी व लीवर को खराब कर सकता है। कॉटन कैंडी में सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल अधिक होने से तमिलनाडु सरकार इसकी बिक्री पर रोक लगा चुकी है।

ये हैं मानक
फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर प्रेमचंद ने  बताया कि खाने-पीने की वस्तुओं में रंग का इस्तेमाल करने के कई नियम हैं। सिंथेटिक या मेटेलिक रंग तो कतई इस्तेमाल नहीं कर सकते। जिन रंगों का इस्तेमाल करना भी होता है, उनका मानक यह है कि प्रति मिलियन 100 पीडीए का इस्तेमाल कर सकते हैं। मतलब 10 हजार का 100वां भाग इस्तेमाल हो सकता है। मानकों के अनुसार टोमैटो केचअप में रंग का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।


Spread the love
  • Related Posts

    Crash: अमेरिका में क्रैश हुआ विमान, हादसे में 12 लोगों की मौत, स्काईडाइविंग के लिए ले जा रहा था यात्री

    Spread the love

    Spread the loveअमेरिका के मिसौरी राज्य में स्काइडाइविंग के लिए यात्रियों को ले जा रहा एक विमान रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान पर सवार सभी 12 लोगों की मौत…


    Spread the love

    मूंछ मुंडवाकर 2300 KM दूर छिपा था टीएमसी नेता, करोड़ों के सोलर घोटाले का आरोप,केरल से हुआ गिरफ्तार

    Spread the love

    Spread the loveपश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के सोलर ऊर्जा परियोजना घोटाले की जांच के बीच पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। आरामबाग नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन और तृणमूल…


    Spread the love