भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने रविवार को इतिहास रच दिया। वह विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज बन गए हैं। उन्होंने जापान के नाकानिशी जुन्या को रोमांचक शूट-ऑफ में हराकर यह उपलब्धि हासिल की। इस जीत के साथ धीरज ने भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज के लिए 16 साल का इंतजार खत्म किया। जयंत तालुकदार अंतिम पुरुष रिकर्व तीरंदाज थे जिन्होंने 2010 में एडिनबर्ग में कांस्य पदक जीता था।
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- इसी साल जून में तुर्किये के अंताल्या में विश्वकप स्टेज-3 के दौरान धीरज ने दो स्वर्ण पदक जीते थे। इस सफलता के पीछे संघर्ष, त्याग और परिवार के भरोसे की लंबी कहानी छिपी है।
- एक समय ऐसा था जब उपकरण खरीदने के लिए उनकी मां को अपना मंगलसूत्र गिरवी रखना पड़ा था, जबकि पिता श्रवण कुमार बेटे का सपना पूरा करने के लिए खुद तीरंदाजी के जज बन गए थे।
- आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ तीरंदाजी जजों में शामिल हैं पिता श्रवण कुमार।
- धीरज तीरंदाजी छोड़ने तक का मन बना चुके थे, लेकिन उनकी मां रेवती ने अपना मंगलसूत्र गिरवी रखकर कर्ज लिया ताकि बेटे के लिए नया धनुष खरीदा जा सके।
- धीरज के करियर का सबसे मुश्किल दौर 2017 में आया। बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें महंगे विदेशी उपकरणों की जरूरत थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।
पुरुष वर्ग में यह जीत क्यों खास है?
धीरज बोम्मादेवरा विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज हैं। उन्होंने 16 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया है। इससे पहले, जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में कांस्य पदक जीता था। पुरुष वर्ग में भारत को यह प्रतिष्ठित खिताब पहली बार मिला है।
क्या किसी अन्य भारतीय ने भी स्वर्ण जीता है?
डोला बनर्जी एकमात्र अन्य भारतीय हैं जिन्होंने विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने 2007 में दुबई में महिला व्यक्तिगत खिताब अपने नाम किया था। डोला की जीत के बाद से किसी भी भारतीय ने विश्व कप फाइनल में स्वर्ण नहीं जीता था। दीपिका के नाम भारतीयों में सबसे अधिक विश्व कप फाइनल पदक हैं, जिनमें पांच रजत और एक कांस्य शामिल हैं।






