फिर से कोविड जैसा लॉकडाउन लगाने की मांग, इस बढ़ती जानलेवा बीमारी ने तबाही मचाई

 

 

यूनाइटेड किंगडम  इन दिनों गंभीर संक्रामक रोग मेनिनजाइटिस का प्रकोप झेल रहा है। यहां यूनिवर्सिटी ऑफ केंट में पिछले कुछ दिनों में हालात काफी तेजी से बिगड़े हैं। एक सोशल इवेंट के दौरान मेनिनजाइटिस का प्रकोप फैलने से कई छात्र बीमार हो गए थे, इनमें से दो की मौत भी हो गई थी। संक्रमितों की संख्या अब बढ़कर 20 से अधिक हो गई है,  नौ की पुष्टि लैब में हो चुकी है और 11 मामलों की जांच अभी भी चल रही है।

 

यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (UKHSA) ने बताया कि मेनिनजाइटिस के कारण हालात काफी तेजी से बिगड़े हैं, छात्रों में काफी डर देखा जा रहा है। लिहाजा छात्रों के एक समूह ने संस्थान से उनकी सुरक्षा के लिए और अधिक प्रयास करने की अपील की है। मांग की गई है कि फिर से कोविड के दौर जैसा लॉकडाउन लगाया जाए ताकि संक्रमण का प्रसार को रोका जा सके और लोगों की जान बच सके।

 

गौरतलब है कि मेनिनजाइटिस के शिकार एक से दूसरे व्यक्ति में ये बीमारी तेजी से फैल सकती है। रोगियों में ब्रेन से संबंधित कई तरह की जटिलताओं को खतरा रहता है। 

मेनिनजाइटिस  के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी पहले ही मेनिनजाइटिस के प्रसार को  ‘राष्ट्रीय घटना’ घोषित कर चुकी है, अब यूनिवर्सिटी ऑफ केंट के छात्र मांग कर रहे हैं कि कैंपस को तुरंत बंद कर दिया जाए। इससे संबंधित एक याचिका पर अब तक लगभग छह हजार छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

  • यूनिवर्सिटी ऑफ केंट के अलावा लंदन और फ्रांस में भी संक्रमण के कुछ मामले सामने आए हैं।
  • खबरों के मुताबिक दवा की दुकानें वैक्सीन और एंटीबायोटिक्स की मांग पूरी करने में मुश्किलों का सामना कर रही हैं।
  • नेशनल फार्मेसी एसोसिएशन ने पुष्टि की है कि अभी निजी तौर पर खरीदने के लिए मेनिनजाइटिस बी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
  • विश्वविद्यालय स्वास्थ्य अधिकारियों के सहयोग से 5,000 से ज्यादा छात्रों को मेनिनजाइटिस वैक्सीन के साथ-साथ संक्रमण से बचाव के लिए एंटीबायोटिक्स भी दे रहा है।
  • हालांकि जिन छात्रों ने यह याचिका शुरू की है, उनका मानना है कि संस्थान को उनकी सुरक्षा के लिए और भी ज्यादा कदम उठाने चाहिए।
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क्या कहते हैं अधिकारी?

फिलहाल यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का कहना है कि वे पब्लिक हेल्थ गाइडलाइंस का पालन कर रहे हैं और कैंपस को खुला रख रहे हैं। छात्रों को चेताया गया है कि वे लगातार बुखार, सिरदर्द, गर्दन में अकड़न या उल्टी जैसे लक्षणों पर नजर रखें और अगर उन्हें ये लक्षण दिखें तो तुरंत मेडिकल मदद लें।

यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर मेडिकल स्कूल के सीनियर क्लिनिकल लेक्चरर डॉ. भरत पंखानिया कहते हैं, इस आउटब्रेक से निपटने का मुख्य तरीका टारगेटेड एंटीबायोटिक्स देना है, न कि लॉकडाउन या बड़े पैमाने पर पाबंदियां लगाना।

‘सुपर-स्प्रेडर’ इवेंट से फैला था संक्रमण

गौरतलब है कि यह प्रकोप पिछले सप्ताह कैंटरबरी के ‘क्लब केमिस्ट्री’ नाइटक्लब से शुरू हुआ था। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह एक ‘सुपर-स्प्रेडर’ इवेंट साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में मामलों में बढ़ोतरी होने की आशंका है।

अधिकारियों ने कहा, हम सभी ये जानते हैं कि मेनिनजाइटिस कितना गंभीर हो सकता है। हालांकि सावधानी बरतकर इसके प्रसार को कंट्रोल किया जा सकता है।

यह बीमारी सिर्फ करीबी संपर्क से फैलती है। ड्रिंक्स या खान-पान की चीजें शेयर करने, किस करने से ये तेजी से फैलती है। ट्रेन जैसी आम भीड़-भाड़ वाली जगहों से ये नहीं फैलती इसलिए बहुत बड़े स्तर पर प्रतिबंधों का मतलब नहीं दिखता है।

 

 

मेनिनजाइटिस के कारण हो सकती हैं कई तरह की दिक्कतें

यहां जानना जरूरी है कि मेनिनजाइटिस आमतौर वायरल इन्फेक्शन की वजह से होता है, हालांकि बैक्टीरिया, पैरासाइट और फंगस संक्रमण से भी ये दिक्कत हो सकती है।

  • संक्रमण की जटिलताएं काफी गंभीर हो सकती हैं। इससे दौरे पड़ने और तंत्रिकाओं को क्षति होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • गंभीर स्थितियों में इसके कारण सुनने और देखने में दिक्कत, याददाश्त की समस्या, किडनी फेलियर, कोमा और मौत तक हो सकती है।
  • संक्रमण के शिकार 10-15 फीसदी लोगों की इससे मौत हो जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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