अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली सलाहकार संस्था यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी सरकार से अपील की है कि वह आरएसएस नेताओं को राजनयिक सम्मान न दे और न ही उनके साथ किसी तरह की हाई-लेवल मीटिंग करे। यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से पहले आया है। वहीं, भारत पहले ही यूएससीआईआरएफ की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण और वैचारिक पूर्वाग्रह पर आधारित बताते हुए खारिज कर चुका है।
यूएससीआईआरएफ कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार (USG) को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जो फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ यानी धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। यूएससीआईआरएफ ने आसिफ महमूद और जीन मिल्स की इन टिप्पणियों को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है।
महमूद ने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य हैं। यह भारत का एक मुख्य संगठन है, जिसके सहयोगी समूहों ने ईसाइयों और मुसलमानों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब आरएसएस नेता मोहन भागवत अमेरिका का दौरा करने वाले हैं।’
हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी उठाए सवाल
एडवोकेसी ग्रुप ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने कहा कि मोहन भागवत के दौरे को मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ आरएसएस नेटवर्क से जुड़े हिंसा के आरोपों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इस एडवोकेसी ग्रुप ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ‘एकता’ का उत्सव धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति को छिपा नहीं सकता।
मार्च की रिपोर्ट में भी भारत पर निशाना
मार्च में यूएससीआईआरएफ की सालाना रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन को लेकर भारत की आलोचना की गई थी। रिपोर्ट में आरएसएस और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) सहित कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं पर ‘टारगेटेड प्रतिबंध’ लगाने का समर्थन किया गया था। यूएससीआईआरएफ ने इन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
भारत ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। भारत का कहना है कि यह संस्था लगातार देश की “गलत और चुनिंदा” तस्वीर पेश करती है और उसकी रिपोर्ट ‘संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक नैरेटिव’ पर आधारित होती हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 मार्च को एक बयान में कहा था कि यूएससीआईआरएफ को भारत की ‘चुनिंदा आलोचना’ करने के बजाय अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़-फोड़ और हमलों की चिंताजनक घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अमेरिका द्वारा भारत को चुनिंदा रूप से निशाना बनाए जाने तथा अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता और डराने-धमकाने की घटनाओं का भी जिक्र किया था। भारत ने इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत बताई थी।






