दिल्ली- आबादी की रफ्तार अधिक और आवास कम, 76 लाख मकानों में सिमटी 2.3 करोड़ की जनसंख्या वाली दिल्ली

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नगणना 2027 के पहले चरण में सामने आए आंकड़ों ने संकेत दिया है कि दिल्ली की आबादी लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही आवास तथा बुनियादी ढांचे पर दबाव भी तेजी से बढ़ रहा है। घरों की गणना और आवास संबंधी सर्वेक्षण में राजधानी में 2.30 करोड़ से अधिक लोगों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जबकि मकानों की संख्या 75.98 लाख पाई गई है।

 

प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 75,98,982 मकानों और 54,98,560 परिवारों की गणना की गई। इन मकानों में सामान्य रूप से निवास करने वाली आबादी 2,30,78,796 दर्ज की गई है। हालांकि जनगणना अधिकारियों का कहना है कि ये शुरुआती आंकड़े हैं और फरवरी 2027 में होने वाली वास्तविक जनगणना के बाद अंतिम तस्वीर सामने आएगी।

 

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली में औसतन एक मकान पर लगभग तीन व्यक्ति निवास कर रहे हैं, जबकि एक परिवार का औसत आकार 4.2 सदस्यों का है। विशेषज्ञों के अनुसार चुनौती केवल बढ़ती आबादी नहीं है, बल्कि आबादी और उपलब्ध शहरी संसाधनों के बीच बढ़ता असंतुलन भी है। इसका प्रभाव विशेष रूप से बाहरी और घनी आबादी वाले इलाकों में दिखाई दे रहा है।

 

उत्तर-पूर्व जिला सबसे अधिक आबादी वाला
जनसंख्या के लिहाज से उत्तर-पूर्व जिला सबसे आगे है, जहां 28.68 लाख लोगों की गणना की गई है। इसके बाद दक्षिण-पश्चिम जिले में 25 लाख और पश्चिम जिले में 24.42 लाख लोग दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर नई दिल्ली जिला सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र है, जहां केवल 2.44 लाख लोगों की गणना हुई है।

33 बिंदुओं पर जुटाई गई जानकारी
पहले चरण के दौरान मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और परिवारों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े 33 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी एकत्र की गई। यह अभियान 16 मई से 14 जून तक चला, जिसमें 50 हजार से अधिक कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। सर्वेक्षण के लिए कुल 45,863 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) बनाए गए थे। प्रत्येक ब्लॉक में औसतन 180 मकान शामिल थे।

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अधिकारियों का कहना है कि फरवरी 2027 में होने वाली अंतिम जनगणना से राजधानी की वास्तविक आबादी, जनसंख्या वृद्धि की गति और विभिन्न क्षेत्रों पर बढ़ते दबाव की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल पहले चरण के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि दिल्ली में जनसंख्या वृद्धि का रुझान जारी है और आने वाले वर्षों में आवास, परिवहन, जलापूर्ति, स्वास्थ्य तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।


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