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दिल्ली उच्च न्यायालय ने विवाह की संस्था को विरोधाभासी बताते हुए कहा है कि यदि पति-पत्नी के बीच के मुद्दों का जल्द समाधान नहीं किया जाता है, तो ‘बेहतर आधा’ (better half) ‘कड़वाहट भरा आधा’ (bitter half) बन जाता है। न्यायालय ने कहा कि मानव संबंधों में सबसे खूबसूरत पति-पत्नी का रिश्ता तब सबसे भयानक हो जाता है, जब वैवाहिक गठबंधन में चीजें गलत हो जाती हैं।
न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव ने यह टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति की अपील स्वीकार करते हुए की, जिसे निचली अदालत ने अपनी पत्नी के मुंह में कीटनाशक डालकर उसकी हत्या के प्रयास के मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने नाफे सिंह को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत इरादे और ज्ञान के संबंध में कोई ठोस सबूत नहीं था।
यह मामला नाफे सिंह और उनकी पत्नी से जुड़ा था। दोनों ने वर्ष 2000 में शादी की थी, लेकिन एक साल के भीतर ही उनके रिश्ते में खटास आ गई थी। अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2001 में एक वैवाहिक विवाद के दौरान पति ने कथित तौर पर पहले अपनी पत्नी को कीटनाशक पिलाने की कोशिश की। जब वह इसमें असफल रहा तो उसने सीधे कंटेनर से कीटनाशक उसके गले में डाल दिया।
इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी और निचली अदालत ने नाफे सिंह को दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने अपील पर सुनवाई करते हुए अभियोजन के साक्ष्यों की जांच की और पाया कि धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के लिए जरूरी इरादे और ज्ञान को साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने नाफे सिंह को बरी कर दिया।