दिल के दौरे के 50 फीसदी से अधिक मामलों में अस्पताल पहुंचने में होती है देर

• 6 घंटे के बाद, रक्त की आपूर्ति में कमी के कारण हृदय की मांसपेशियों को अपरिवर्तनीय क्षति होती है

फैजाबाद, 18 सितम्बर 2022: भारत में हर दूसरे हार्ट अटैक के मरीज को अस्पताल पहुंचने में 3 घंटे से अधिक समय लगता है, जो सरकारी आंकड़ों के अनुसार 60 मिनट के आदर्श गोल्डन ऑवर से लगभग 13 गुना अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में कुछ स्थानों पर अस्पताल पहुंचने में 15 घंटे से अधिक का समय भी लग जाता है, इसका कारण है ट्रांसपोर्टेशन में लगने वाला समय जो विभिन्न कारणों से मरीज को अस्पताल पहुंचाने के दौरान गोल्डन ऑवर से कई गुना बढ़ जाता है।

लखनऊ के मिडलैंड अस्पताल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ सुशील यादव का कहना है कि हार्ट अटैक के मरीज इलाज के लिए सही सुविधा वाले अस्पताल तक पहुंचाने में अभी भी बहुत कीमती समय बर्बाद हो जाता है।

उन्होंने आगे बताया, “ज्यादातर मामलों में अस्पताल पहुंचने में देरी ग्रामीण क्षेत्रों या ऐसे इलाकों से सम्बंधित होती है, जिनमें रोगी के दूर स्थित होने के कारण, समय से अस्पताल पहुंचना मुश्किल होता है। 6 घंटे की देरी के बाद, रक्त की आपूर्ति में कमी के कारण हृदय की मांसपेशियों को न ठीक होने वाला नुकसान पहुंच चुका होता है।

उन्होंने कहा, “अगर हार्ट अटैक के मरीज को समय से क्लॉट बस्टर दवा नहीं दी जाती है, तो मरीज के खतरे से बाहर निकलने की संभावना लगभग शून्य हो जाती है। आदर्श स्थिति में, दिल के दौरे के मामलों के इलाज के लिए स्पेशलिस्ट अस्पताल तक पहुंचने में 30 मिनट से अधिक समय नहीं लगना चाहिए।”

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डॉ सुशील यादव ने बताया, “उत्तर प्रदेश की स्थिति शेष भारत से बहुत अलग नहीं है। रोगी हमारे पास देरी से पहुंचता है और जब तक हम रोगी का इलाज शुरू करते हैं, तब तक हृदय की बहुत सारी मांसपेशियां मृत हो चुकी होती हैं जिससे सफल उपचार के बाद भी शेष जीवन व्यतीत करने में इसका प्रभाव बना रहता है। रोगी को ऐसे मेडिकल सेंटर्स पर पहुंचाना बेहद आवश्यक होता है, जो 24X7 हृदय संबंधी आपात स्थितियों में समुचित इलाज प्रदान करने के लिए सुसज्जित हैं।”

डॉ सुशील ने कहा, लखनऊ के मिडलैंड अस्पताल में हम किसी भी कार्डिएक इमरजेंसी के लिए रोगियों का 24X7 इलाज कर रहे हैं, जहां अत्याधुनिक तकनीकों के साथ रोगियों को सस्ती कीमत पर देखभाल प्रदान की जा रही है।”

हार्ट अटैक के लक्षणों को ऐसे पहचानें

• छाती में बेचैनी: अधिकांश दिल के दौरे में छाती के बीच में बेचैनी होती है जो कुछ मिनटों से अधिक समय तक रहती है- या यह खत्म होकर फिर शुरू हो सकती है। इस स्थिति में असहज दबाव, निचोड़ने या दर्द की तरह महसूस होता है।
• ऊपरी शरीर के अन्य क्षेत्रों में बेचैनी: लक्षणों में एक या दोनों बाहों, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट में दर्द या बेचैनी शामिल हो सकती है।

• सांस लेने में कठिनाई: यह सीने में तकलीफ के साथ या इसके बिना भी हो सकती है।
• अन्य लक्षण: ठंडा पसीना, जी मिचलाना या सिर चकराना।

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