वन अनुमति के इंतजार, यूपीसीएल के निकासी पर ऐतराज के बीच अब नियामक आयोग ने धरासू सोलर प्रोजेक्ट पर फैसला सुना दिया है। यह प्रदेश में कहीं अन्य जगह निजी भूमि पर लगेगा। अगले साल 31 मार्च तक इसे पूरा करना होगा। इसका टैरिफ पूर्व निर्धारित 3.88 रुपये प्रति यूनिट ही रहेगा।
परियोजना के करीब एक मेगावाट हिस्से पर वन विभाग के पेड़ होने के कारण एनओसी अटक गई। इस बीच 40 प्रतिशत भूमि समतलीकरण पूरा होने के बाद यूपीसीएल ने अप्रैल 2025 में यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि क्षेत्र में छोटे सोलर प्रोजेक्ट को तकनीकी स्वीकृति मिलने के कारण धरासू सब स्टेशन से इस चार मेगावाट बिजली की निकासी संभव नहीं। प्रोजेक्ट अटकने और निवेश फंसने पर डेवलपर ने नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
आयोग के निर्देश पर यूजेवीएनएल, यूपीसीएल और कंपनी के बीच तीन सितंबर को बैठक हुई, जिसमें आपसी सहमति से समाधान निकाला गया। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा एवं सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने इस समझौते को राज्य हित में स्वीकार करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।
अब विकासकर्ता को अपने खर्च पर नई निजी जमीन पर टीएफआर के लिए आवेदन करना होगा, जिस पर यूपीसीएल को पांच दिन के भीतर जांच करनी होगी। प्रोजेक्ट निजी भूमि पर जाने के कारण यूजेवीएनएल को मिलने वाला आठ प्रतिशत का रेगुलेटरी मार्जिन समाप्त कर दिया गया है।






