पुलिस की दी गई शिकायत के अनुसार जून 2024 में आरोपियों ने खुद को क्रोएशिया वर्क परमिट के लिए अधिकृत एजेंट बताकर संपर्क किया और भरोसा दिलाया कि उनके पास वैध लाइसेंस है। इस पर विश्वास करते हुए शिकायतकर्ता ने 17 कैंडिडेट्स की प्रोसेसिंग कराते हुए कुल 18 लाख रुपये आरोपियों को दिए जिसमें 15 लाख ऑनलाइन और तीन लाख नकद शामिल हैं। आरोप है कि बाद में सभी वीजा आवेदन फर्जी दस्तावेज के कारण निरस्त हो गए। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने जाली दस्तावेज और फर्जी जॉब ऑफर के जरिये ठगी की। लगातार दबाव के बाद आरोपियों ने केवल 4.5 लाख रुपये ही वापस किए जबकि शेष रकम लौटाने के लिए टालमटोल करते रहे।
पीड़िता का कहना है कि गत 31 जनवरी को देहरादून आकर रकम मांगने पर आरोपी राजीव शर्मा ने 22 फरवरी तक भुगतान का आश्वासन देते हुए शपथपत्र भी दिया, लेकिन तय समय के बाद भी रकम नहीं लौटाई और अब संपर्क भी बंद कर दिया है। बताया गया कि आरोपियों का कार्यालय भी बंद मिला। तहरीर में बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले से विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं।