एक शख्स ने अपना आशियाना बनाने के लिए एक बड़ा प्लॉट खरीदा लेकिन समय गुजरने के साथ उनकी उम्र 60 के पार निकल गई। इस पड़ाव पर दैनिक खर्चे निकालने भी मुश्किल हो गए। ऐसे में उन्होंने उस संपत्ति को गिरवी रखकर 20.81 लाख रुपयों का रिवर्स मॉर्टगेज लोन ले लिया और बेफिक्र हो गए। क्योंकि इस लोन की किस्तें जीते-जी नहीं चुकानी पड़तीं। उनकी मृत्यु के बाद लोन चुकाने की जिम्मेदारी बच्चों की थी।
बच्चों ने लोन नहीं चुकाया तो अदालत ने बीते बुधवार को बैंक को उस संपत्ति पर कब्जा लेने की अनुमति दे दी। यह फैसला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रिंकी साहनी ने सरफेसी एक्ट के तहत सुनाया। पेश मामले में बुजुर्ग ने अपनी 214 वर्ग मीटर जमीन एक निजी बैंक के पास गिरवी रखी थी। निधन के बाद उत्तराधिकारी संपत्ति के लाभार्थी तो बने लेकिन वे बैंक के लोन की मासिक किस्तें समय पर नहीं जमा करवा सके।








