विशेषज्ञों के अनुसार लोग एआई को डॉक्टर मानने लगे हैं। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई भी दिक्कत होती है तो वे फौरन अपने लक्षणों के आधार पर एआई से पूछते हैं कि क्या मैं बीमार हूं। इसके बाद एआई संभावित गंभीर से गंभीर बीमारी के बारे में बताता है। इससे मरीजों के अंदर डर भी पैदा होता है। लोग एआई की सलाह पर दवाइयां भी खा लेते हैं। जो उनके शरीर में नकारात्मक रिएक्शन के रूप में दिखाई देते हैं। ऐसे में मरीज को घबराहट, शरीर में खुजली, चेहरे पर सूजन और एलर्जी समेत कई दिक्कतें आती हैं।
दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरुन पांडेय के मुताबिक शरीर में दवाओं का रिएक्शन बीमारी के प्रतिकूल दवा सेवन करने पर होता है। इसका असर शरीर के कई अंगों पर भी पड़ता है। यह भी देखा गया है कि कई दवाओं की स्पेलिंग मिलती-जुलती होती है, ऐसे में कई बार एआई की ओर से बताई गईं दवाएं बीमारी से बिल्कुल अलग हो जाती हैं। इस तरह के मरीज पिछले करीब एक-डेढ़ वर्षाें में बढ़े हैं। इससे जान भी जोखिम में पड़ सकती है।