Davos Plane Glitch: US से दावोस जा रहे ट्रंप के विमान में आई तकनीकी खराबी, बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा

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मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विमान एयर फोर्स वन मंगलवार शाम स्विट्जरलैंड के लिए रवाना होने के करीब एक घंटे बाद जॉइंट बेस एंड्रयूज लौट आया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने बताया कि उड़ान भरने के बाद विमान में मामूली विद्युत तकनीकी समस्या सामने आई, जिसके बाद एहतियातन वापस लौटने का फैसला लिया गया।

विमान में मौजूद एक पत्रकार के अनुसार, टेकऑफ के कुछ देर बाद प्रेस केबिन की लाइट्स कुछ समय के लिए बंद हो गई थीं। हालांकि, उस वक्त कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया। उड़ान के लगभग आधे घंटे बाद पत्रकारों को सूचित किया गया कि विमान वापस लौट रहा है। एयर फोर्स वन विमान सुरक्षित रूप से वॉशिंगटन डीसी क्षेत्र में उतार लिया गया। इसके बाद राष्ट्रपति के दल ने बैकअप विमान से स्विट्जरलैंड के दावोस के लिए उड़ान भरी।

 

दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद WEF में ट्रंप की पहली प्रत्यक्ष उपस्थिति

यह राष्ट्रपति ट्रंप की दोबारा पद संभालने के बाद वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पहली प्रत्यक्ष उपस्थिति है। ट्रंप आज को अमेरिकी नीतियों पर बोलने वाले हैं। रवाना होने से पहले उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कम गैस कीमतों और मजबूत अर्थव्यवस्था का जिक्र किया।

फिलहाल एयर फोर्स वन के रूप में इस्तेमाल हो रहे दोनों विमान करीब चार दशक पुराने हैं। बोइंग इनके नए संस्करण तैयार कर रहा है, लेकिन यह परियोजना लगातार देरी का सामना कर रही है। ये विमान विशेष सुरक्षा तकनीक से लैस होते हैं, जिनमें रेडिएशन शील्डिंग, एंटी-मिसाइल सिस्टम और अत्याधुनिक संचार सुविधाएं शामिल हैं, ताकि राष्ट्रपति दुनिया के किसी भी कोने से सैन्य संपर्क बनाए रख सकें।

गौरतलब है कि पिछले साल कतर के शाही परिवार ने ट्रंप को एक लग्जरी बोइंग 747-8 जंबो जेट उपहार में दिया था, जिसे एयर फोर्स वन बेड़े में शामिल करने को लेकर काफी चर्चा हुई थी। यह विमान फिलहाल सुरक्षा मानकों के अनुरूप बदले जाने की प्रक्रिया में है। इस बीच, लेविट ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इस समय कतर का जेट ‘काफी बेहतर विकल्प लग रहा है।

और पढ़े  ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी- कहा- फिर पीछे जाने का मौका नहीं

 

 

डब्ल्यूईएफ की 56वीं वार्षिक बैठक

डब्ल्यूईएफ की 56वीं वार्षिक बैठक 19 से 23 जनवरी 2026 के बीच दावोस में हो रही है, जिसमें 130 से ज्यादा देशों के करीब 3,000 वैश्विक नेता हिस्सा ले रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और तेज तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है।


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