रामनगरी में धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने के लिए प्रस्तावित ‘दशरथ पथ’ परियोजना तेजी से आकार ले रही है। करीब 15 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दशरथ समाधि स्थल को सीधे शहर से जोड़ते हुए श्रद्धालुओं के लिए एक सुगम और आकर्षक मार्ग तैयार करेगा। 80 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है जून के अंत तक पूरा होने का अनुमान है।
यह मार्ग एनएच 27 स्थित साकेत पेट्रोल पंप से शुरू होकर बिल्वहरी घाट तक जाएगा। परियोजना के तहत सड़क को फोर लेन मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जबकि दशरथ समाधि तक जाने वाले मार्ग को 24 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। साथ ही इस पूरे कॉरिडोर को नव्य अयोध्या योजना से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इस नए मार्ग के विकसित होने से आजमगढ़, बलिया, बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। वे पूरा बाजार होते हुए सीधे अयोध्या पहुंच सकेंगे और बिना किसी जाम के दशरथ समाधि स्थल के दर्शन-पूजन कर सकेंगे। इससे शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव भी कम होने की उम्मीद है। लोकनिर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसपी भारती ने बताया कि निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। दो माह में काम पूरा होने की उम्मीद है।
30 भव्य स्तंभ स्थापित किए जाएंगे
– दशरथ पथ को केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके डिवाइडर पर 30 भव्य स्तंभ स्थापित किए जाएंगे, जिनमें 15 हस्त मुद्रा और 15 शस्त्र मुद्रा की कलात्मक झलक देखने को मिलेगी। सड़क किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे।
दशरथ समाधि और शनि शांति की मान्यता
– अयोध्या के आग्नेय कोण में सरयू तट के निकट स्थित महाराजा दशरथ की समाधि आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन करने से शनि की साढ़े साती और अढ़ैया के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। अब ‘दशरथ पथ’ के निर्माण से यह पावन स्थल और अधिक सुगम हो जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि होने की संभावना है।









