नेपाल में बुधवार (27 अगस्त) को भोटेकाशी नदी में आई भारी बाढ़ ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। दरअसल, हिमालयी क्षेत्र में आई किसी आपदा का असर नेपाल तक होगा, इसकी वैज्ञानिकों को आशंका तो थी, लेकिन तिब्बत में एक हिमस्खलन तबाही की विकरालता को इस कदर बढ़ा देगा, यह अनुमान लगाना भी मुश्किल था। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो अब तक 359 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1000 लोग लापता हैं, जिनमें 288 भारतीय भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि आपदा के बाद स्थितियां सामान्य होने के साथ ही इस आंकड़े में और स्पष्टता आएगी।
नेपाल में कैसे 10 घंटे के अंदर बिगड़ गई पूरी स्थिति?
नेपाल के रसुवा जिले में भोटकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान सुबह 8:37 बजे से शाम 6:30 बजे के बीच यानी लगभग 10 घंटे में स्थितियां बहुत तेजी से बिगड़ती चली गईं। बाढ़ का यह पानी भोटकोशी से होते हुए त्रिशूली, मलेखु और देवघाट तक पहुंच गया।
सुबह 08:37 बजे: तिब्बत क्षेत्र में हिमस्खलन के चलते भूमिगत हलचल दर्ज की गई। बर्फ और चट्टान के इस मलबे ने नेपाल-चीन सीमा पर बहने वाली ल्हेन्दे नदी को अवरुद्ध कर दिया, जिससे वहां एक अस्थायी प्राकृतिक बांध बन गया।
सुबह 08:40 बजे: रसुवा के स्याफ्रुबेंसी में जल-स्तर की निगरानी करने वाले स्टेशन ने अपना अंतिम डेटा दर्ज किया, जिसमें नदी का स्तर 1.62 मीटर था।
सुबह 08:50 बजे: हिमस्खलन के बाद हुई भूमिगत हलचल के ठीक 13 मिनट बाद स्याफ्रुबेंसी मॉनिटरिंग स्टेशन ने काम करना बंद कर दिया और डेटा ट्रांसमिशन रुक गया।
सुबह 09:05 बजे: अधिकारियों को सूचना मिली कि तिब्बत की तरफ से भोटकोशी नदी में एक बहुत बड़ी बाढ़ की लहर घुस चुकी है।
सुबह 09:15- 09:16 बजे: खतरे को देखते हुए अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई की। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन के नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को 6,00,000 से अधिक चेतावनी एसएमएस भेजे गए, ताकि वे सतर्क हो सकें।
सुबह 09:20 बजे: बेत्रावती जल-स्तर मॉनिटरिंग स्टेशन ने भी डेटा भेजना बंद कर दिया। इसका आखिरी दर्ज जल-स्तर 3.55 मीटर था।
सुबह 10:28 बजे: बाढ़ के धादिंग-गल्छी क्षेत्र में पहुंचने और कुछ ही घंटों में मुगलिन पार करने की आशंका जताई गई। इसके बाद पृथ्वी राजमार्ग, मुगलिन-नारायणघाट सड़क पर यात्रा करने वालों तथा त्रिशूली नदी किनारे बसे लोगों के लिए अतिरिक्त चेतावनियां जारी की गईं।
सुबह 11:26-11.50 बजे: फुर्के (मलेखु) मॉनिटरिंग स्टेशन पर पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया। बाढ़ के प्रचंड वेग ने फुर्के नदी के पक्के पुल और अन्य संरचनाओं को बहा दिया। इसी दौरान बाढ़ का पानी मलेखु क्षेत्र में प्रवेश कर गया।
दोपहर 01:00 बजे: अधिकारियों को पुष्टि मिली कि बाढ़ मुगलिन को पार कर चुकी है। देवघाट तक के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई। देवघाट में नदी का स्तर 4.76 मीटर तक पहुंच गया।
दोपहर 02:14 बजे: कालीखोला मॉनिटरिंग स्टेशन पर पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया, जिसने 12.3 मीटर का उच्चतम स्तर छुआ।
दोपहर 03:20 बजे: बाढ़ का पानी नारायणी-देवघाट क्षेत्र तक पहुंच गया और जल-स्तर लगातार बढ़ता रहा।
शाम 04:00 बजे: देवघाट में पानी का स्तर 6.57 मीटर के अपने उच्चतम शिखर पर पहुंचा और इसके बाद पानी धीरे-धीरे कम होना शुरू हुआ।
शाम 06:30 बजे: देवघाट में जल-स्तर घटकर वापस 4 मीटर पर आ गया और स्थिति कुछ सामान्य हुई।
इस 10 घंटे के विनाशकारी बहाव में बाढ़ के पानी ने अपने साथ लगभग दो करोड़ घन मीटर अतिरिक्त पानी का बहाव लाया था। बाढ़ की चपेट में आने से नदी किनारे बसे कई महत्वपूर्ण जल-स्तर मॉनिटरिंग स्टेशन तबाह हो गए, जिससे डेटा संपर्क टूट गया। इसके अलावा रास्ते में आने वाले कई पक्के पुल, सड़कें और अहम पनबिजली परियोजनाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।






