साइबर जालसाजों ने 83 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर को पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 18.50 लाख रुपये ऐंठ लिए। आरोपियों ने खुद को पहले एयरटेल मुख्यालय का कर्मचारी और फिर महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताकर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। लगातार मानसिक दबाव और निगरानी में रखी गईं महिला डॉक्टर इतनी भयभीत हो गईं कि उन्होंने अपनी एफडी तुड़वाकर दो अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए पूरी रकम भेज दी।
अगले दिन 14 जुलाई को जालसाजों ने जांच के नाम पर रकम एक ‘’सुरक्षित खाते’’ में जमा कराने का दबाव बनाया। महिला सेक्टर-30 स्थित इंडियन बैंक शाखा पहुंचीं, एफडी तुड़वाई और 10.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी आरोपी लगातार वीडियो और फोन कॉल के जरिए उन्हें अपने नियंत्रण में रखते रहे। 17 जुलाई को उन्होंने महिला से आठ लाख रुपये एक अन्य बैंक खाते में भी ट्रांसफर करा लिए।
- डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि आरोपियों की ओर से इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, कॉल डिटेल, आईपी एड्रेस व अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच हो रही है।इसलिए आसान निशाना बनते हैं बुजुर्ग
पूर्व आईपीएस और साइबर विशेषज्ञ प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी और डिजिटल प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी होने से साइबर ठग आसानी से डरा देते हैं। सरकारी एजेंसियों, बैंक या टेलीकॉम कंपनियों का नाम लेकर भरोसा जीतना साइबर ठगों की आम रणनीति है। अकेले रहने वाले बुजुर्ग जल्दी मानसिक दबाव में आ जाते हैं और परिवार से सलाह लिए बिना ही रकम ट्रांसफर कर देते हैं।डिजिटल अरेस्ट के बड़े मामले
- जुलाई 2026: एलआईसी के सेवानिवृत्त प्रबंधक से 35 लाख रुपये ऐंठे।
- जुलाई 2025: महिला वकील से 3.29 करोड़ रुपये लिए।
- जुलाई 2025: 13 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रख बुजुर्ग से 59 लाख रुपये ठगे।
- जून 2025: महिला से 50 लाख रुपये की ठगी।
- दिसंबर 2024: मां-बेटी से 36 लाख रुपये ऐंठ लिए।








