मौसम में हो रहे बदलाव के साथ संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। स्वाइन फ्लू के साथ, मौसमी बुखार, इंफ्लुएंजा को लेकर भी लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।
इस बीच हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लंबे समय के बाद देश में एक बार फिर से कोरोना के कुछ मामले रिपोर्ट किए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में कोविड-19 ने अचानक वापसी की है। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल जैसी बड़ी लैब्स में हर दिन कोविड-19 और एच1एन1 के नए पॉजिटिव मामले सामने आ रहे हैं।
मौसम में बदलाव के साथ बढ़ते श्वसन संक्रमण एच1एन1 (स्वाइन फ्लू), इन्फ्लुएंजा-ए और रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस को लेकर लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जा रही है।
आइए पहले कोविड-19 के जोखिमों के बारे में जान लेते हैं।
कोविड-19 का खतरा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुंबई में सामने आए कोविड-19 के मामलों ने लोगों को अलर्ट कर दिया है। एक तरफ लोग यह मान चुके थे कि कोविड-19 अब बीते दिनों की बात हो गई है, हालांकि फिर से इसकी खबरों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
- विशेषज्ञों के मुताबिक, करीब एक महीने से अस्पतालों की ओपीडी में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामले सामने आ रहे थे।
- पिछले एक सप्ताह में कोविड-19 ने भी अचानक वापसी की है।
- हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल कोविड को लेकर कोई चिंता की बात नहीं है।
गौरतलब है कि विशेषज्ञ पहले भी कहते रहे हैं कि कोविड हमारे बीच में हमेशा बना रहेगा। अनुकूल परिस्थितियां पाते ही वायरस फिर से एक्टिव होकर लोगों को संक्रमित कर सकता है।
कोरोना की प्रकृति को समझिए
कोरोना एक आरएनए वायरस है। ये अपनी प्रकृति के हिसाब से लगातार म्यूटेट होते रहते हैं। अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए कोरोनावायरस में भी लगातार म्यूटेशन देखा जाता रहा है जिससे नए वैरिएंट्स भी सामने आते रहे हैं।
फिलहाल मुंबई के कोविड-19 के कितने पॉजिटिव मामले हैं, संक्रमितों में क्या लक्षण देखे जा रहे हैं और वायरस का कौन सा स्ट्रेन देखा गया है? इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
श्वसन रोगों को लेकर अलर्ट
खबरों के मुताबिक मुंबई सहित देश के कई शहरों में कोविड-19, एच1एन1 (स्वाइन फ्लू), इन्फ्लुएंजा-ए और रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
- अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिन्हें तेज बुखार और श्वसन तंत्र में संक्रमण (नाक, गला और सांस की नली) से जुड़ी गंभीर तकलीफें हो रही हैं।
- चूंकि श्वसन बीमारियों के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हैं, इसलिए बिना पीसीआर जांच के यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि मरीज किस वायरस से संक्रमित हैं।
महामारी विशेषज्ञों का मानना है कि मामलों में यह बढ़ोतरी मौजूदा मौसम में आए बदलाव से जुड़ी हो सकती है। मानसून में देरी होने के कारण हवा में नमी बहुत अधिक बनी हुई है और वातावरण में ठहराव है, जिससे श्वसन संबंधी वायरस सामान्य से अधिक समय तक हवा में मौजूद रह सकते हैं और फैलने की आशंका बढ़ जाती है।
कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बदलते मौसम के साथ श्वसन रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस मौसम में खांसी, बुखार, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें सबसे ज्यादा देखी जाती हैं। के साथ आ रहे हैं। जोखिमों से बचे रहने के लिए कुछ आम सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी हैं।
- श्वसन संक्रमण से बचने के लिए नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और अपनी इम्युनिटी को मजबूत करने वाले उपाय करें।
- हाथों को नियमित रूप से कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से धोएं या हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें।
- फ्लू या प्रदूषण के मौसम में और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने पर मास्क का उपयोग करें।
- अपनी आंखों, नाक को बार-बार छूने से बचें, क्योंकि इससे श्वसन वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।









