बिना अपील 32 साल जेल में रहा दोषी: HC ने कहा-पीड़ा नहीं बढ़ा सकते, जेल प्रशासन की लापरवाही पर नाराजगी

Spread the love

त्या के मामले में सजा के खिलाफ अपील दाखिल करने में 32 साल की देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय प्रक्रिया में इतनी लंबी देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती और अब इस पीड़ा को और लंबा नहीं खींचा जा सकता।

 

कोर्ट ने बताया कि वर्ष 1992 में दोषी ठहराए गए व्यक्ति ने करीब 32 वर्ष जेल में बिताए लेकिन इस दौरान उसकी ओर से अपील तक दाखिल नहीं की गई। हाईकोर्ट ने पाया कि दोषी करीब 11,740 दिनों (लगभग 32 साल) की देरी के बाद अपील लेकर कोर्ट पहुंचा।

कानूनी सहायता प्रणाली की विफलता पर भी चिंता

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि इतने लंबे समय तक कैद के बावजूद अपील दाखिल न होना गंभीर चिंता का विषय है। यदि आरोपी स्वयं अपील दाखिल नहीं कर सका तो यह जेल प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि वह इस दिशा में आवश्यक कदम उठाता।

पीठ ने इस मामले में कानूनी सहायता प्रणाली की विफलता पर भी चिंता जताई और कहा कि इसकी निष्क्रियता का खामियाजा दोषी को नहीं भुगतना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रकरण न्याय व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। हाईकोर्ट ने 32 वर्ष की देरी को माफ करते हुए अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 2 मई को तय की गई है।

ऐसे पहुंची 32 साल पुरानी अपील सुनवाई तक

मार्च 2026 में करनाल जिला जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ने दोषी रमेश की अपील संबंधी अर्जी को हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी को भेजा। इसके बाद अधिवक्ता संजीव शर्मा को मामला सौंपा गया। दस्तावेज तैयार करते समय यह सामने आया कि अपील दाखिल करने में करीब 11,740 दिनों (लगभग 32 वर्ष) की देरी हुई है। वकील ने कोर्ट में देरी माफ करने की दलील पेश की जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। हाईकोर्ट ने करनाल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को निर्देश दिया है कि वे स्पष्ट करें कि इतने वर्षों तक अपील क्यों दाखिल नहीं की गई और संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

और पढ़े   उत्तर कोरिया ने दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, हाई अलर्ट पर जापान, दक्षिण कोरिया भी सतर्क

क्या था मामला

रमेश को 19 नवंबर 1993 को करनाल के सत्र न्यायालय ने हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। अभियोजन के अनुसार, 27 फरवरी 1992 की शाम पुरानी रंजिश के चलते रमेश और उसके पिता फूल सिंह ने प्रीतम सिंह पर चाकू से हमला किया था, जिसकी अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। इस मामले में मृतक के भाई प्रताप सिंह और नारायण सिंह चश्मदीद गवाह थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समय पर न्याय तक पहुंच हर कैदी का अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर मानी जाएगी।


Spread the love
  • Related Posts

    Hormuz- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, US-ईरान टकराव बढ़ने का दिखा असर, तेहरान टैंकर जब्त होने से भड़का

    Spread the love

    Spread the loveओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने ईरानी-झंडे वाले टैंकर को जब्त कर लिया है। इस घटना के बाद ईरान की सेना ने त्वरित प्रतिक्रिया की चेतावनी दी…


    Spread the love

    पश्चिम एशिया तनाव- सीजफायर के बीच दक्षिणी लेबनान में इस्राइली हमले जारी, UAE-ब्रिटेन के शीर्ष राजनयिकों की बैठक

    Spread the love

    Spread the loveपश्चिम एशिया इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। एक ओर जहां संघर्ष के बीच युद्धविराम और बातचीत की उम्मीदें दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी…


    Spread the love