चैत्र छठ- आज नहाय-खाय के साथ चैत्र छठ की शुरुआत, जानिए चार दिवसीय महापर्व में किस दिन क्या होता है?

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लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय से हो गई है। चार दिवसीय महापर्व में व्रती अपनी संतान की लंबी आयु के लिए भगवान सूर्यनारायण की आराधना करती हैं। श्रद्धालु विशेष तौर पर सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। चैत्र छठ पूजा में भी छठी मैय्या और सूर्य देव की पूजा का विधान है। छठ व्रत बहुत कठिन माना जाता है क्योंकि इसे को कठोर नियमों के अनुसार 36 घंटे तक रखा जाता है। छठ मैया की भक्ति में समर्पण, पवित्रता और अनुशासन का विशेष महत्व है। पटना समेत बिहार के सभी जिलों में छठ को लेकर सारी तैयारी पहले ही पूरी हो चुकी है। इस बार चैत्र छठ पर्व की शुरुआत 22 मार्च यानी रविवार को नहाय खाय के साथ हुई।

 

इधर, पटना के गांधी घाटों पर बड़ी संख्या में छठ करने वाले वर्तियों की भीड़ देखी गई। गंगा घाट पर आस्था की डुबकी लगाने आईं महिलाओं ने कहा कि यह व्रत संतान की लंबी उम्र, उसके स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की कामना के साथ रखा जाता है। यह व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। 36 घंटों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए इस व्रत को रखा जाता है। इस दौरान व्रती चौबीस घंटो से अधिक समय तक निर्जल व्रत रखते हैं।

 

चार दिनों वाले पर्व में किस दिन क्या किया जाता है? आइए जानते हैं… 
छठ पर्व की शुरुआत नहाय खाय से होती है। इसके बाद खरना मनाया जाता है। दिनभर व्रत के बाद व्रती रात को पूजा के बाद गुड़ से बनी खीर खाकर उसके बाद से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करती हैं। षष्ठी तिथि छठ पूजा का तीसरा दिन होता है। इस दिन छठ पर्व की मुख्य पूजा की जाती है। छठ पर्व के तीसरे दिन व्रती और परिवार के सभी लोग नदी, सरोवर, पोखर या तालाब आदि में जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और छठी मईया का पूजन किया जाता है। चौथा दिन यानी सप्तमी तिथि छठ महापर्व का अंतिम दिन होता है। इस दिन प्रातः उगते सूर्य को जल दिया जाता है। इसी के साथ छठ पर्व का समापन होता है।

  • 22 मार्च: नहाय-खाय
  • 23 मार्च: खरना
  • 24 अप्रैल: शाम का अर्घ्य
  • 25: सुबह का अर्घ्य और पारण
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छठ का इतना महत्व क्यों है?
ज्योतिष-कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित अरुण कुमार मिश्रा के अनुसार, यह लोक आस्था का महापर्व है। मतलब, यह बिहार और पूर्वांचल के लोगों की आस्था का प्रतीक है। आस्था पर न तो सवाल किया जा सकता है और न ही इसका कोई जवाब हो सकता है। जहां तक महत्व का सवाल है तो यह प्रकृति को चलाने वाले सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। यह देवी कात्यायनी से आशीर्वाद मांगने का पर्व है। छठ दिखाता है कि जिसका अंत है, उसका उदय भी होगा।

छठ को लेकर पटना में क्या तैयारी?
छठ महापर्व को लेकर जिला प्रशासन ने सारी तैयारी पूरी कर ली है। जिला प्रशासन की ओर से 25 मार्च तक सुरक्षा की व्यापक इंतजाम किए गए हैं। घाटों पर महिला व्रतियों के लिए चेंजिंग रूम, सुरक्षा को लेकर वाच टावर, शौचालय, पीने के पानी, मेडिकल कैंप, भीड़ नियंत्रण के लिए जगह-जगह माइक, नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था की गई है। पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि पटना में छठ घाट पर सुरक्षा की सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। सभी जगह पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर ली गई है। महिला, पुरुष पुलिस बल के साथ-साथ गस्ती पार्टी, पैदल लाठी पार्टी और पेट्रोलिंग गाड़ी को भी लगातार पेट्रोलिंग का निर्देश दिया गया है। कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।


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